अहमदाबाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि खादी "विकसित और आत्मनिर्भर भारत" के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकती है।
उन्होंने अफसोस जताया कि कभी स्वाभिमान की प्रतीक खादी को (देश की) आजादी के बाद दूसरे दर्जे का उत्पाद माना जाने लगा।
प्रधानमंत्री ने यह बात यहां साबरमती नदी के तट पर 'आजादी का अमृत महोत्सव' के तहत आयोजित खादी उत्सव के दौरान कही।
मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि शनिवार को देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर करीब 7,500 महिलाओं ने कार्यक्रम में एक साथ चरखा कताई कर कीर्तिमान बनाया है।
उन्होंने कहा, “इतिहास गवाह है कि खादी स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरणा स्रोत बनी और गुलामी की बेड़ियों को तोड़ा। इसी तरह खादी भारत को विकसित राष्ट्र बनाने, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खादी को स्वाभिमान का प्रतीक बनाया था।
"आजादी के बाद, इस खादी को दूसरे दर्जे का उत्पाद माना जाता था। इससे खादी और ग्रामोद्योग नष्ट हो गए और हमारे बुनकर इससे प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद खादी की अनदेखी की गई जिसके चलते देश में बुनकरों की स्थिति खराब हो गई।
‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत खादी उत्सव का आयोजन किया जा रहा।
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