नयी दिल्ली, दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और यह कहते हुए मौत की सजा देने से इनकार कर दिया है कि अपराध दुर्लभतम से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है।
अदालत ने 26 जुलाई को आरोपी को दोषी ठहराया और कहा कि यह गैर इरादतन हत्या का मामला है, जो हत्या नहीं है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने 12 जनवरी 2003 को एक व्यक्ति को लोहे की रॉड से मारा था, जिसके चार दिन बाद उसकी मौत हो गई थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमचला ने 5 सितंबर को अपने आदेश में कहा, ''आरोपी विपुल कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दंडनीय अपराध करने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।'
अदालत ने आरोपी पर 4 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसमें से 3.75 लाख रुपये मृतक के कानूनी वारिस को दिए जाएंगे।
अदालत ने कहा कि मौत की सजा नहीं दी जा सकती क्योंकि मामला दुर्लभतम से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है। न्यायाधीश ने कहा कि निःसंदेह यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है लेकिन यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि सुशील की मौत लोहे की रॉड से सिर पर वार करने से हुई और इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि हत्या क्रूर तरीके से की गई।