नयी दिल्ली, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की विदेशी शाखा को "भारतीय अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान" कहा जा सकता है और इन प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थानों के संकाय सदस्यों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर विदेश भेजा जा सकता है। यह जानकारी सूत्रों ने दी है।
सूत्रों ने कहा कि विदेशों के आईआईटी को छात्रों की संख्या तय करने की आजादी मिल सकती है। हालांकि, इन संस्थानों में भारतीय छात्रों की संख्या 20 फीसदी से कम होगी।
एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, "आईआईटी के वैश्विक विस्तार के लिए केंद्र द्वारा गठित समिति ने अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं। इनमें यह सुझाव दिया गया है कि विदेशों में आईआईटी स्थापित करने के लिए स्वामित्व उस निर्दिष्ट उच्च शिक्षण संस्थान (एचईआई) के पास ही रहना चाहिए। उक्त स्थान पर स्थित इस नए स्थान को 'भारतीय अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान' कहा जाएगा।
उन्होंने कहा, “मौजूदा IIT से विदेशों में स्थित संस्थानों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का प्रावधान होना चाहिए। शुरुआती वर्षों में एक नए संस्थान के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे यहां के शिक्षकों के अनुभव से पर्याप्त लाभ मिल सकता है।
कई IIT को परिसर स्थापित करने के लिए पश्चिम एशिया और दक्षिण एशियाई देशों से अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं। आईआईटी दिल्ली यूएई में अपना कैंपस स्थापित करने पर विचार कर रहा है जबकि आईआईटी मद्रास श्रीलंका, नेपाल और तंजानिया में विकल्प तलाश रहा है।