इस्लामाबाद, संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी के अनुसार, पाकिस्तान के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कम से कम 650,000 गर्भवती महिलाओं को देखभाल की सख्त जरूरत है। देश में बाढ़ से 1,100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 3 करोड़ 30 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) ने भी चेतावनी दी कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ लिंग आधारित हिंसा (जीबीवी) का खतरा बढ़ गया है। वहीं, जून की शुरुआत से ही बाढ़ से तबाह हुए पाकिस्तान में अब तक करीब दस लाख घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
यूएनएफपीए के अनुसार, अगले महीने 650,000 में से 73,000 से अधिक महिलाओं के प्रसव की उम्मीद है। उन्हें मातृ स्वास्थ्य देखभाल की सख्त जरूरत है। यूएनएफपीए, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर काम करने वाली एक एजेंसी ने अभूतपूर्व बाढ़ से प्रभावित महिलाओं की दयनीय तस्वीर पेश करती है।
डॉन अखबार ने संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के हवाले से कहा, "अगले महीने 73,000 महिलाओं के प्रसव की उम्मीद के साथ, उन्हें कुशल जन्म परिचारक, नवजात देखभाल और मदद की आवश्यकता होगी।"
यूएनएफपीए ने कहा कि गर्भधारण और प्रसव किसी आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदाओं के खत्म होने का इंतजार नहीं करते। एजेंसी ने कहा कि महिलाएं और बच्चे सबसे कमजोर हैं और संकट की इस घड़ी में अत्यधिक देखभाल की जरूरत है।
यूएनएफपीए-पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रतिनिधि बख्तियार कादिरोव ने कहा, "यूएनएफपीए यह सुनिश्चित करने के लिए जमीन पर काम कर रहा है कि गर्भवती और प्रसव कराने वाली महिलाओं को सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी जीवन रक्षक सेवाएं मिलती रहें।"
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने दुनिया से राहत प्रयासों को जारी रखने का आग्रह करते हुए कहा कि सिंध में 1,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र या तो आंशिक रूप से या पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बलूचिस्तान है, जहां 198 स्वास्थ्य प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हो गए हैं।