नई दिल्ली: दुनिया के अरबपति आज भले ही अरबों की दौलत के मालिक हों, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने जीवन में बहुत संघर्ष किया है। अरबपति वारेन बफेट, जेफ बेजोस और एलोन मस्क कभी सिर्फ एक साधारण काम करते थे। उन्होंने नौकरी करते हुए अपने करियर की शुरुआत की। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे दुनिया के इन अरबपतियों ने अपने करियर की शुरुआत एक साधारण नौकरी से की और कैसे उन्होंने इतनी सफलता हासिल की।
गैस स्टेशन पर एक अटेंडेंट की नौकरी करते थे धीरूभाई अंबानी
धीरूभाई अंबानी को आज के समय में कौन नहीं जानता है। लेकिन एक समय था जब धीरूभाई अंबानी यमन के एक गैस स्टेशन पर अटेंडेंट का काम करते थे। यह उनका पहला काम था। ये वो दौर था जब उन्हें हर महीने सिर्फ 300 रुपये सैलरी मिलती थी। लेकिन अपनी मेहनत के दम पर वह काम करते-करते उसी गैस स्टेशन पर मैनेजर भी बन गए। इसके बाद वे वर्ष 1957 में भारत लौट आए। इसके बाद उन्होंने (धीरूभाई अंबानी) अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। यह बिजनेस बाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज बन गया, उस वक्त उनकी नेटवर्थ करीब 96.5 अरब डॉलर थी। फोर्ब्स ने 2006 में दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में धीरूभाई को 138वां स्थान दिया था। इस समय उनकी कुल संपत्ति 2.9 बिलियन डॉलर थी। उसी साल 6 जुलाई को धीरूभाई अंबानी का निधन हो गया।
रिसर्च असोसिएट की नौकरी करते थे नारायणमूर्ति
भारत में आईटी क्षेत्र के जनक कहे जाने वाले इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की पहली नौकरी एक शोध सहयोगी के रूप में थी। नारायण मूर्ति ने आईआईएम अहमदाबाद में एक संकाय के लिए काम किया, जहां वे बाद में मुख्य प्रणाली प्रबंधक बने। इसके बाद नारायण मूर्ति (N.r. नारायण मूर्ति) ने सॉफ्ट्रोनिक्स नाम की कंपनी शुरू की, जो काम नहीं आई। इसके बाद उन्होंने मजबूरी में पुणे में पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स में नौकरी शुरू की जहां उन्हें 10 हजार रुपये वेतन मिलता था, उन्होंने 1981 में 6 दोस्तों के साथ इंफोसिस की शुरुआत की। अक्टूबर 2021 में, उनकी कुल संपत्ति 4.3 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। जब नारायण मूर्ति (N.r. नारायण मूर्ति) ने कंपनी शुरू करने का फैसला किया, तो उनके पास पूंजी नहीं थी। ऐसे में उनकी पत्नी ने अपनी बचत में से पैसे मूर्ति को दे दिए। इस छोटी सी रकम से मूर्ति ने पुणे में एक कंपनी शुरू की और इसका नाम इंफोसिस कंसल्टेंट्स रखा। कंपनी का पहला ऑफिस नारायण मूर्ति के घर में एक कमरा था। कंपनी का पंजीकृत कार्यालय राघवन का घर था।
रतन टाटा की पहली नौकरी
देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने 1961 में टाटा स्टील जमशेदपुर में काम किया था। इससे पहले रतन टाटा टाटा मोटर्स में काम कर चुके हैं। यहां वह टेल्को स्थित जीटी हॉस्टल में सामान्य कर्मचारी की तरह रहा करते थे। टाटा स्टील में काम करते हुए उनकी पहली जिम्मेदारी ब्लास्ट फर्नेस और लाइमस्टोन को मैनेज करने की थी। जब रतन टाटा को नौकरी का पहला ऑफर मिला तो उनके पास बायोडाटा नहीं था। बिना रिज्यूमे के आईबीएम पहुंचने के बाद रतन टाटा ने वहां मौजूद इलेक्ट्रॉनिक टाइपराइटर से तुरंत अपना रिज्यूम बनाया और उसे सौंप दिया, हालांकि रतन टाटा आईबीएम में नौकरी नहीं की।
2022 के फोर्ब्स बिलियनेयर का खिताब पाने वाले जेफ बेजोस ने मैकडॉनल्ड्स में फ्राई कुक के रूप में अपनी पहली नौकरी की थी। उन्होंने 1980 में अपनी पहली नौकरी शुरू की, जिसके लिए उन्हें मुश्किल से 2 डॉलर प्रति घंटे का वेतन मिला। बेजोस ने बाद में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उन्होंने प्राइवेट जॉब करना शुरू कर दिया। वॉल स्ट्रीट में, वह तब बैंकर्स ट्रस्ट नामक कंपनी में बहुत अच्छी स्थिति में थे। काम के दौरान उन्हें अमेरिका में खूब घूमने का मौका मिला। उन यात्राओं के दौरान वे कई लोगों से मिलते और उनके सामने आने वाली समस्याओं के बारे में जानते थे, उन्हें समझ में आया कि इंटरनेट के इस बढ़ते युग में ई-मार्केटिंग कंपनी का भविष्य बहुत अच्छा होगा। इस जॉब पर उन्होंने बिजनेस की बारीकियां सीखीं और आज 167.6 अरब डॉलर के मालिक हैं।
मैकडॉनाल्ड्स में फ्राइ कुक थे जेफ बेजोस
बर्कशायर हैथवे के सीईओ और चेयरमैन वॉरेन बफेट ने भी अपने करियर की शुरुआत नौकरी से की थी। वारेन बफेट अमेरिका के मशहूर अखबार द वाशिंगटन पोस्ट के लिए अख़बार डिलीवरी बॉय का काम करते थे। इस काम से वॉरेन 1994 में 175 डॉलर महीना कमाते थे। उन्होंने ओहामा में अपने पड़ोसियों को वाशिंगटन पोस्ट की लगभग 500,000 प्रतियां वितरित कीं। इस काम के लिए उन्हें हर महीने $175 मिलते थे। कंपनी के सीईओ को बर्खास्त करने के लिए वॉरेन बफेट ने 1964 में बर्कशायर हैथवे को खरीदा था। अगर आज के साल 2022 में देखें तो वॉरेन की कुल संपत्ति 103.4 डॉलर पहुंच गई है।