ग्रेटर नोएडा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ग्रेटर नोएडा में इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में अंतर्राष्ट्रीय डेयरी महासंघ विश्व डेयरी सम्मेलन का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे खुशी है कि आज दुनिया भर के डेयरी सेक्टर के विशेषज्ञ भारत में एकजुट हुए हैं। डेयरी क्षेत्र की क्षमता न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है, बल्कि यह दुनिया भर के लाखों लोगों की आजीविका का एक प्रमुख स्रोत भी है। भारत में डेयरी सहकारी समितियों का इतना विशाल नेटवर्क है, जिसका उदाहरण पूरी दुनिया में मिलना मुश्किल है। ये डेयरी सहकारी समितियां देश के दो लाख से अधिक गांवों के करीब दो करोड़ किसानों से दिन में दो बार दूध एकत्र कर ग्राहकों तक पहुंचाती हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि आज का कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब भारत ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे कर लिए हैं। यह भी संयोग ही है कि आज के आयोजन से भारत के 75 लाख से अधिक डेयरी किसान भी तकनीक के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। उन्होंने विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन में किसान साथियों का भी स्वागत किया।
सीएम योगी ने पीएम मोदी का किया स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी का स्वागत किया। इस उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा 50 देशों के अतिथि और प्रतिनिधि शामिल हुए. इस सम्मेलन की सबसे बड़ी बात यह है कि इस आयोजन का भारत में 48 साल बाद किया जा रहा है। इस तरह का पहला सम्मेलन 1974 में हुआ था। साथ ही यह शिखर सम्मेलन 12 सितंबर से 15 सितंबर तक चलेगा। इस शिखर सम्मेलन में डेयरी उद्योग से जुड़े नेता, विशेषज्ञ, किसान और नीति निर्माता मौजूद रहेंगे। इस मौके पर पीएम मोदी ने सीएम योगी, केंद्रीय कैबिनेट सहयोगी पुरुषोत्तम रूपाला, मंत्रियों, सांसदों, इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन के अध्यक्ष पी. ब्रजले, आईडीएफ के डीजी कैरोलिन एमोंड को धन्यवाद देते हुए शुरुआत की।
भारत तैयार कर रहा है डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डेटाबेस
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के डेयरी सेक्टर को विज्ञान से जोड़कर उसका दायरा और बढ़ाया जा रहा है। भारत डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डेटाबेस बना रहा है। डेयरी सेक्टर से जुड़े हर जानवर को टैग किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक की मदद से हम जानवरों की बायोमेट्रिक पहचान कर रहे हैं। हमने इसे नाम दिया है- एनिमल बेस। पशु आधार के माध्यम से पशुओं की डिजिटल पहचान की जा रही है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर नजर रखने के साथ-साथ डेयरी उत्पादों से संबंधित बाजार का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मैं अक्सर कहता हूं कि खेती में मोनोकल्चर एकमात्र समाधान नहीं है, बल्कि विविधता समय की जरूरत है। यह बात पशुपालन पर भी लागू होती है। इसलिए, भारत में आज स्वदेशी नस्लों और संकर नस्लों दोनों पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान का खतरा भी कम होगा।