नयी दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायपालिका सेवा (डीएचजेएस) के एक उम्मीदवार की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश देने से इनकार कर दिया है, जो एक अंक कम होने के कारण नहीं पहुंच सका।
न्यायमूर्ति विभु बाखरू और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता, जो एक वकील है, ने सभी असफल उम्मीदवारों में सबसे अधिक अंक हासिल किए थे, लेकिन अदालत ने उसकी कोई मदद नहीं की क्योंकि अंकन प्रणाली या प्रक्रिया में कोई दोष नहीं होने पर अदालत उनकी कोई मदद नहीं कर सकती।
पीठ ने कहा कि अदालत ऐसे 'दुर्लभ और असाधारण मामलों' में राहत देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सकती है, जिसमें यह साबित हो जाता है कि परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कोई स्पष्ट त्रुटि है या निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निष्पक्ष मूल्यांकन का उम्मीदवार का अधिकार प्रभावित हुआ है।