सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाने की बात कही है. इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अन्वेषण अभियान दल के साथ गंगोत्री से गोमुख जाने वाले मार्ग पर करीब एक किलोमीटर तक चले। गंगोत्री मंदिर में की मां गंगा की पूजा।
उत्तरकाशी: सीएम धामी ने आज गंगोत्री धाम में पतंजलि आयुर्वेद, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के संयुक्त अभियान दल के कार्यक्रम में भाग लिया। इधर सीएम धामी ने देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाने का संकल्प एक बार फिर दोहराया है। सीएम धामी ने कहा कि हमने संकल्प लिया है कि हम उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाएंगे। हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सीएम धामी ने कहा कि अब तक हमारे चारों धामों में 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। यह अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।
आपको बता दें कि एनआईएम, आईएमएफ और पतंजलि आयुर्वेद रक्तवन ग्लेशियर क्षेत्र में नए औषधीय पौधों के साथ-साथ एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए नई जगहों का पता लगाने के लिए एक साथ आए हैं। जिसका एक संयुक्त अभियान दल आज गंगोत्री के रक्तावन ग्लेशियर क्षेत्र में अन्वेषण के लिए रवाना हुआ है। इस टीम को सीएम धामी और बाबा रामदेव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान सीएम धामी ने एक बार फिर उत्तराखंड को दुनिया की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाने की बात कही।
इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अन्वेषण अभियान दल के साथ गंगोत्री से गोमुख जाने वाले मार्ग पर करीब एक किलोमीटर तक चले। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पतंजलि और निम का यह अन्वेषण अभियान उत्तराखंड के लिए एक बड़ी खोज और उपलब्धि होगी। उत्तराखंड को धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में भी यह कदम सार्थक होगा।
सीएम धामी (CM पुष्कर सिंह धामी) ने कहा कि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही अध्यात्म की भूमि रहा है। ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे चार धामों के साथ-साथ पवित्र स्थान भी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार संत समाज के साथ मिलकर काम कर रही है।
सीएम धामी ने कहा कि आने वाला दशक उत्तराखंड का होगा। राज्य सरकार राज्य के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में उत्तराखंड आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।