नई दिल्ली: नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर विवाद पहले से चल रहा था, अब सेंगोल कनेक्शन ने नया ऐंगल जोड़ दिया है। सरकार ने शॉर्ट फिल्म जारी की और नेहरू का जिक्र कर सत्ता हस्तांतरण में सेंगोल की महत्ता समझाई। सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्टूडियो तक की डिबेट में सेंगोल का जिक्र हो रहा है। उधर, 28 मई के कार्यक्रम का बहिष्कार कर चुकी कांग्रेस ने सेंगोल खुलासे पर सरकार को घेरा है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि नई संसद को व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की झूठी कहानियों से पवित्र किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस ने दावे ज्यादा किए और तथ्य कम रखे हैं। एक न्यूज आर्टिकल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए जयराम ने 4 बातें कही हैं। वह लिखते हैं कि तत्कालीन मद्रास प्रांत में एक धार्मिक प्रतिष्ठान द्वारा एक शाही राजदंड की बात कही गई थी और मद्रास शहर में तैयार कर अगस्त 1947 में नेहरू को भेंट की गई थी।
दूसरे पॉइंट में जयराम ने साफ कहा, 'इस बात के कोई दस्तावेजी साक्ष्य नहीं हैं कि माउंटबेटन, राजाजी और नेहरू ने इस राजदंड को अंग्रेजों से भारत को सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक माना था। इस बारे में जो भी दावे किए जा रहे हैं, वे सब फर्जी हैं। यह कुछ लोगों के दिमाग की उपज है और अब उसे फैलाया जा रहा है।' सरकार और भाजपा के नेता यह कहकर आलोचना कर रहे हैं कि इतने महत्वपूर्ण प्रतीक को संग्रहालय में रखकर भुला दिया गया। इस पर जयराम ने लिखा कि राजदंड को इलाहाबाद संग्रहालय में सबको देखने के लिए रखा गया था। 14 दिसंबर 1947 को नेहरू ने क्या कहा था, वह पब्लिक डोमेन में है। कांग्रेस नेता ने एक पेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया है जिसमें कहा गया है कि मैं भारत की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता का सम्मान करता हूं।
चौथे पॉइंट में जयराम ने लिखा है कि राजदंड का इस्तेमाल पीएम और उनके समर्थक तमिलनाडु में अपने राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐसी ब्रिगेड है जो अपने विकृत उद्देश्यों के हिसाब से तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है। आखिर में उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नई संसद के उद्घाटन कार्यक्रम में क्यों बुलाया नहीं जा रहा है? नई संसद में सेंगोल की स्थापना की घोषणा के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चेन्नई में कहा था कि यह तमिलनाडु के लिए गर्व की बात है। न्यूज रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे बड़ा तथ्य इस बारे में एक ब्लॉग पोस्ट को बताया गया है जिसे प्रसिद्ध एक तमिल लेखक ने लिखा था।
चर्चा शुरू हुई तो भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी राजगोपालाचारी के परपोते सी. आर. केसवन सामने आए। उन्होंने चेन्नई में पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस पवित्र राजदंड सेंगोल को फिर से जीवंत किया है। उन्होंने कहा कि 1947 में जब आजादी नजदीक थी तब राजगोपालाचारी ने नेहरू को बताया था कि यह प्राचीन परंपरा है कि जब सत्ता का हस्तांतरण होता है तब पवित्र राजदंड सेंगोल को मुख्य पुजारी नए राजा को देते हैं और यही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह राजदंड पहले माउंटबेटन को दिया गया। बाद में पुजारी ने इसे गंगाजल से पवित्र किया और नेहरू को दे दिया। यह एक ऐतिहासिक घटना थी। इसके बार में किसी को नहीं पता था। उन्होंने यह भी कहा कि इस राजदंड को संग्रहालय में यह कहकर रख दिया गया कि यह एक गोल्डन वॉकिंग स्टिक है जो नेहरू को दी गई थी।
सरकार द्वारा जारी वीडियो में 96 साल के वुम्मिडी इत्तिराजुलु और वुम्मिडी सुधाकर को दिखाया गया है। इत्तिराजुलु कहते हैं, 'अधीनम की ओर से कहा गया था कि इसे बनाना है। किसी ने कहा था। उन्होंने हमें ड्रॉइंग्स दिखाई। यह गोल चीज थी। एक लंबा दंड था। वैसा ही बनाना था। इसे महत्वपूर्ण जगह पर रखना था। ऐसे में उच्च क्वॉलिटी का बनना था। उन्होंने ऑर्डर दिया था कि इसे सिल्वर का बनाया जाए, उस पर सोने की परत चढ़ाई जाए। इसके बनाने के काम में शामिल होकर मैं काफी खुश था।'