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एवरेस्ट पर भीड़ और मौतें अमीरों के नाते...पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने सुनाई 1984 की कहानी.

 
  • Admin
  • 29 May 2023
  • 1018
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देहरादूनः नेपाल में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट के फतह के 70 साल हो गए। 29 मई 1953 को एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नार्गे पहली बार एवरेस्ट पर चढ़े थे। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर मनुष्यों के पहले फतह के 70वें साल के मौके पर भारतीय पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने एक महत्वपूर्ण समस्या की ओर दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश की है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि माउंट एवरेस्ट पर अमीर पर्वतारोहियों की भीड़ बढ़ रही है, जिनके पास पैसा तो है लेकिन सही इरादे नहीं हैं। उनके पास प्रशिक्षण और अनुभव की भी कमी है।

पहाड़ पर इसलिए बढ़ रहीं मौतें
बछेंद्री पाल ने इसे पहाड़ पर मौत के आंकड़ों के बढ़ने की प्रमुख वजह बताई है। उन्होंने कहा कि पर्वत की चोटी पर पर्वतारोहियों की लगातार हो रही मौतों को रोकना है तो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए दी जाने वाली परमिट को रेगुलेट करना होगा। उन्होंने बताया कि साल 1984 में जब वह पहली बार चोटी पर चढ़ी थीं, तब एवरेस्ट पर एक सीजन में सीमित एक्सपेडिशन (चढ़ाई अभियान) की ही इजाजत थी। सिर्फ अनुभवी और प्रशिक्षित लोग की चढ़ाई कर सकते थे लेकिन अब जिसके भी पास पैसा है, वह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ सकता है, जैसे वह कोई टूरिस्ट स्पॉट हो।

600 से ज्यादा लोग हर साल चढ़ रहे एवरेस्ट
बछेंद्री पाल ने कहा कि एवरेस्ट पर चढ़ाई करने का पूरा खर्चा 40 से 50 हजार डॉलर है। इसमें परमिट फीस और अन्य जरूरी सामानों के खर्चे भी शामिल हैं। बता दें कि नेपाल हर साल तकरीबन 5 मिलियन डॉलर एवरेस्ट की क्लाइंबिंग फीस से कमा लेता है। बछेंद्री पाल ने कहा कि पहले पर्वतारोहण के लिए क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी अहम था। अब 600 से ज्यादा लोग हर साल एवरेस्ट पर चढ़ रहे हैं। यह एक पागलपन है।

कमर्शलाइज हो गया है पर्वतारोहण
सात बार एवरेस्ट पर चढ़ने वाले भारतीय पर्वतारोही लव राज सिंह धर्मशक्तू ने बछेंद्री की तरह की ही चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि चाहे एवरेस्ट पर चढ़ना हो या नेपाल की किसी अन्य चोटी पर चढ़ाई करनी हो, सबका पूरी तरह से व्यवसायीकरण हो गया है। इसने पर्वतारोहण के बेसिक फाउंडेशन्स (बुनियादी भावना) का अतिक्रमण कर लिया है। धर्मशक्तू ने एक घटना याद करते हुए कहा, 'एक बार मैं पूरी तरह से हैरान रह गया था, जब मैंने देखा कि एक शौकिया पर्वतारोही बेस कैंप पर क्लाइंबिंग बूट्स पहनना सीख रहा है। वह भी चढ़ाई से सिर्फ तीन-चार दिन पहले।'

उन्होंने कहा कि आजकल लोग एक महीने में नेपाल की 6 से 7 चोटियों पर चढ़ाई कर लेते हैं। मुझे याद है कि साल 1990 में हमें माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने में दो महीने से ज्यादा का समय लगा था। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण अब एक टीम स्पोर्ट्स से शुद्ध व्यक्तिगत करतब बन गया है। इसका यह ट्रांजिशन दुखद और चिंताजनक है।

 

 
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