हरिद्वार: देवभूमि और भगवान भोलेनाथ की नगरी हरिद्वार में कनखल स्थित उनके ससुराल दक्ष मंदिर में युवतियों के छोटे कपड़ों में आने पर पाबंदी लगा दी गई है। दक्ष मंदिर सहित ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव और देहरादून के टपकेश्वर महादेव मंदिर में भी यह प्रतिबंध लागू किया जा रहा है। यह तीनों मंदिर पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी से जुड़े हुए हैं। कोटद्वार स्थित सिद्धबली हनुमान मंदिर में भी मर्यादित कपड़ों में मंदिर आने की अपील की गई है। इसके साथ ही हर की पैड़ी (Har Ki Pauri) पर आने वाले भक्तों को जूते-चप्पल पहनने की इजाजत नहीं होगी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष और पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी का कहना है कि हरिद्वार के कनखल दक्ष प्रजापति मंदिर में छोटे छोटे कपड़े पहन कर आने वाली महिलाओं और युवतियों को मंदिर में प्रवेश करने से रोका जा सकता है। श्री महंत रवींद्र पुरी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मंदिर में 80 फीसदी शरीर ढके कपड़े पहन कर ही महिलाएं, युवतियां दर्शन करने के लिए आए। कहा कि समाज में जो प्रचलन चल रहा है उस पर सचेत रहने की आवश्यकता है। माताएं, बहने और कन्या मंदिर में आती हैं, उनका पहनावा ठीक होना चाहिए। कई बार मंदिर में छोटे कपड़ों में आने वाली महिलाओं और कन्याओं को देखकर लोग असहज महसूस करते हैं, जिससे समाज में अच्छा संदेश नहीं जाता है।
उन्होंने कहा कि कांवड़ मेले में मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रहेगी। ऐसे में सभी को अपने पहनावे पर ध्यान देना होगा। महंत ने कहा है कि युवावस्था में बच्चे हर तरह की बुराई की तरफ आकर्षित होते हैं। इस पर अंकुश लगना आवश्यक है। परिवार के लोगों को अपने बच्चों को समझाना चाहिए। बता दें कि श्री महंत इससे पहले भी कई बार 80 फीसदी शरीर ढके कपड़े पहनकर मंदिर में आने की अपील कर चुके हैं। हालांकि अब कावड़ मेले को देखते हुए उन्होंने एक बार फिर से श्रद्धालुओं से यह अपील की है। श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र अजय ने भी महानिर्वाणी अखाड़े के बयान पर सहमति जताई है।
उन्होंने कहा है कि मंदिरों में दर्शन के दौरान 80 प्रतिशत शरीर ढके कपड़े पहन कर आना चाहिए। लोगों को पर्यटन और धार्मिक यात्रा में फर्क समझना चाहिए। कहा कि प्रत्येक धार्मिक स्थल की अपनी परंपरा और मर्यादा होती है। उसी के अनुसार मंदिरों में मर्यादित आचरण करना चाहिए। उसी माहौल के अनुरूप आचरण और वेशभूषा होनी चाहिए। कहा कि स्वाभाविक रूप से यदि आप धार्मिक स्थल की ओर जा रहे हैं तो आप की वेशभूषा मर्यादित होनी चाहिए। यह उन धार्मिक स्थलों से लाखों करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। जहां आप यात्रा पर जा रहे हैं। धार्मिक स्थलों की मान्यता से छेड़छाड़ करने का किसी को भी अधिकार नहीं है।
हरिद्वार के जिलाधिकारी धीरज सिंह गबराल ने हर की पैड़ी पर जूते चप्पल पहनकर जाने से रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। डीएम की ओर से इसके लिए प्लान तैयार किया जा रहा है और पांच अलग-अलग जगह जूता स्थल और सामान घर बनाने की योजना है। वर्तमान में हर की पैड़ी के ब्रह्म कुंड में किसी भी व्यक्ति के लिए जूते चप्पल पहन कर जाने पर रोक है। श्री गंगा सभा की ओर से पहले से यह रोक लगाई गई है, लेकिन हर की पैड़ी के मालवीय घाट, नाई घाट समेत अन्य घाटों पर ऐसी कोई रोक नहीं है। अब जिलाधिकारी ने इस संबंध में अपने स्तर से कवायद शुरू कर दी है। शिव सेतु के पास, कांगड़ा घाट, हर की पैड़ी चौकी के पास, नाई घाट के पास जूता स्टॉल बनाया जा सकता है। वहीं गर्मियों में नंगे पैर जाने पर श्रद्धालुओं के पैर न जले इसके लिए हर की पैड़ी पर कालीन बिछाई जाएगी। सर्दियों में यह कालीन हर की पैड़ी पर बिछी रहेगी।