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90 के दशक में रेव पार्टी का 'किंग' था LSD, सबको लगा था खत्म, उस ड्रग की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी.

 
  • Admin
  • 07 Jun 2023
  • 1017
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नई दिल्ली: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने देशभर में फैले एक बड़े ड्रग्स सिंडिकेट का खुलासा किया है। NCB के डिप्टी DG ज्ञानेश्वर सिंह ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अलग-अलग छापेमारी में देश में ड्रग्स तस्करी से जुड़े गैंग के 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तस्करों से नशीली दवा लीसर्जिक एसिड डाईएथिलेमाइड (LSD) के 15 हजार पैकेट्स बरामद किए गए हैं। इनकी मार्केट वैल्यू हजारों करोड़ रुपये में है। ये एलएसडी ड्रग्स का इतिहास काफी पुराना है। 1960 के दशक से ही इस ड्रग का खूब इस्तेमाल होता था। लेकिन 1970 और 80 के दशक की रेव पार्टियों में एलएसडी ड्रग की पॉपुलरिटी फीकी पड़ गई, जब युवा एक्स्टसी और एमडीएमए जैसे सिंथेटिक ड्रग्स के आदी हो गए थे। लेकिन इतने साल बाद इस ड्रग की इतनी बड़ी खेप का खुलासा होने के बाद हर कोई हैरान है।

1960 के दशक में ही शुरू हो गया था इस्तेमाल
इस एलएसडी ड्रग का इस्तेमाल गोवा में रेव पार्टियों में होता था। 1960 के दशक के में शुरू हुए हिप्पी युग में हेलुसीनोजेन का भारी इस्तेमाल देखा गया। इसे पहली बार 1938 में स्विस वैज्ञानिक अल्बर्ट हॉफमैन द्वारा तैयार किया गया। एलएसडी ड्रग के लिए 2009 तक हॉफमैन ब्रांड काफी लोकप्रिय था। हालांकि इसके कैलिफोर्निया सनशाइन, स्काई एंजल्स, ब्लू हेवन, ऑरेंज हेजज और रेड ड्रैगन जैसे ब्रांड भी पॉपुलर थे। मंगलवार को जो ड्रग पकड़ा गया है वो गैमागोब्लिन और होली स्पिरिट ऑफ असुरा ब्रांड का है।

रेव पार्टियों में बढ़ा ड्रग्स का प्रचलन
दुनियाभर में रेव पार्टी का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इनकी शुरुआत 80 और 90 के दशक में ही हुई। उन दिनों हर बड़े शहर में आए दिन रेव पार्टी होती थीं। लोक रेव पार्टी में जाना और उसका आयोजन करना शान समझते थे। रेव पार्टी में जमकर मौज-मस्ती होती थी। यहां धड़ल्ले से गैरकानून ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता था। उस वक्त सबसे ज्यादा इस्तेमाल एलएसडी ड्रग का होता था। तेज आवाज में म्यूजिक, नशा और अश्लीलता रेव पार्टियों की पहचान होती थी। यहां जमकर पैसा बरसता था, इसलिए रईसजादों का मजमा यहां लगता था। इस सबके बीच ड्रग्स के तस्करों के लिए ये पार्टियां किसी लाटरी से कम नहीं थीं।

कौन-कौन से मिल जाते थे ड्रग?
ये रेव पार्टियां आज के किसी मंहगे क्लब की तरह नहीं होती थीं। यहां एंट्री के लिए मोटी फीस देनी पड़ती थी, इसलिए हर कोई यहां नहीं जाता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन रेव पार्टियों में एलएसडी तो मिलता ही था, साथ में गांजा, चरस, कोकीन और मेफेड्रोन जैसे ड्रग्‍स का इस्तेमाल होता है। जो भी रेव पार्टी का आयोजन करता था, वो ही इन ड्रग्स का इंतजाम करता था। इन रेव पार्टियों में अमीरजादे लड़के ही नहीं बल्कि काफी संख्या में लड़कियां भी शामिल होती थीं। ये लोग रातभर ड्रग्स के नशे में रहते और एन्जॉय करते।

क्या होता है LSD
लिसर्जिक एसिड डाइथिलेमाइड (एलएसडी) वास्तव में सिंथेटिक रसायन आधारित एक मादक पदार्थ है। यह सिंथेटिक दवा, जिसे एसिड ट्रिप या बैड ट्रिप के रूप में भी जाना जाता है। ज्ञानेश्वर सिंह ने बताया कि एलएसडी आजकल यूथ और स्टूडेंट में बहुत फेमस है, लेकिन ये बहुत खतरनाक है। इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। डाक टिकटों की तरह दिखने वाले इन धब्बों को खरीदारों और विक्रेताओं द्वारा बिना संदेह पैदा किए कहीं भी छुपाया जा सकता है।

 

 
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