मोदी सरकार ने विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक अलग ही धार दी है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अब भारत पूरी धमक के साथ दो टूक बातें करता है। अगर इसके पीछे किसी को श्रेय जाना चाहिए तो वे विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल हैं। ये दोनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ हैं।

आज पूरी दुनिया में भारत डंका बज रहा है। मोदी सरकार की विदेश और कूटनीति के चर्चे हैं। तस्वीर में प्रधानमंत्री के अगल-बगल दिख रही दो शख्सीयतें इसके पीछे सबसे बड़ी वजह हैं। इन्होंने विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को अलग तरह की धार दे दी है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी ताकत हैं। पिछले कुछ सालों में इन्होंने हर मौके पर भारत की बदलती तस्वीर से दुनिया को रूबरू कराया है। इन्होंने वह रास्ता पकड़कर रखा जिसने दुनिया को भारत को केंद्र में रखने पर मजबूर कर दिया।

जयशंकर और अजीत डोभाल अपने-अपने फनों के माहिर हैं। विदेश मंत्री अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बदलते भारत की बुलंद और बेबाक आवाज हैं। दूसरी तरफ डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के मास्टर हैं। उन्हें भारत का 'जेम्स बॉन्ड' भी कहा जाता है।

अब एक बार जरा उस मौके की भी बात कर लेते हैं जहां तीनों साथ दिखाई दिए। मौका था पापुआ न्यू गिनी में फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिस आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) की बैठक का। मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पापुआ न्यू गिनी की यात्रा की है। यहां पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ था। एयरपोर्ट पहुंचने पर पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने पीएम मोदी के पैर छूकर उनका वेलकम किया।

पीएम मोदी के साथ जयशंकर और डोभाल दोनों की जबर्दस्त केमिस्ट्री है। यही बात इनकी आपसी केमिस्ट्री पर भी लागू होती है। किसी भी बड़े मसले पर इन दोनों की राय के काफी मायने होते हैं। चीन और पाकिस्तान से टक्कर की बात हो या फिर यूक्रेन पर दुनिया के नजरिये से इतर रुख अपनाने का मसला, इन्होंने कभी भारत को मात खाने नहीं दी है।