UGC NEW Rule for Assistant Professor: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए आदेश के मुताबिक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए अभ्यर्थियों को अब पीएचडी की आवश्यता नहीं होगी। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अभ्यर्थी नेट, SET की परीक्षा पास करके असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकेंगे। वहीं, जिन अभ्यर्थियों के पास पीएचडी कि डिग्री है और वे नेट, सेट या SLET की परीक्षा नहीं पास हैं, तब भी प्रोफेसर बन सकते हैं। यानि कि अभ्यर्थियों के पास दो में एक योग्यता जरूरी है। यह नियम सिर्फ डायरेक्ट भर्ती के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए लागू होगा।
अगर किसी विवि में एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती निकाली जाती है तो अभ्यर्थियों के लिए नेट, जेआरएफ के साथ पीएचडी होना भी अनिवार्य होगा। आपको बता दें कि 2018 में विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर यानि कि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर भर्ती के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य कर दी गई थी। हालांकि अभ्यर्थियों को अपनी पीएचडी पूरी करने के लिए तीन साल का समय दिया गया था और यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को केवल 2021 से भर्ती के लिए मानदंड लागू करना शुरू करने का निर्देश दिया था।
2021 में यूजीसी ने सहायक प्रोफेसर के पद के लिए न्यूनतम योग्यता के रूप में पीएचडी करने की तारीख को जुलाई 2023 तक बढ़ा दिया था। वहीं, अब यूजीसी ने नियमों बदलाव कर दिया है। नोटिस जारी करते हुए यूजीसी ने कहा है कि संशोधित नियम भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि केवल योग्य अभ्यर्थियों को सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जाए।
बता दें असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए हर वर्ष विभिन्न विश्वविद्यालयों की तरफ से कई पदों पर भर्तियां की जाती हैं। जिसके लिए संबंधित विवि की तरफ से रिक्रूटमेंट ड्राइव आयोजित की जाती है।