हिमाचल में जल प्रलय के बीच मंडी की एसपी सौम्या सांबशिवन की खूब चर्चा हो रही है। मंडी में ब्यास बारिश के चलते उफान पर है। नदी के साथ लगते इलाकों के लोगों को वहां से हटने के आदेश दिए गए हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसा नहीं कर रहे। उनका कहना कि जीवन भर की कमाई को कैसे छोड़ दें। इस बीच समस्या का समाधान न होने की स्थिति में मूसलाधार बारिश के बीच मंडी की पुलिस अधीक्षक सौम्या सांबशिवन उफनती नदी के किनारे पहुंची। करीब आधा घंटा काउंसलिंग के बाद लगभग 80 प्रवासियों को नदी के किनारे से हटाकर गुरुद्वारा में आश्रय दिया गया। जिसके बाद प्रदेश में उनकी कार्यशैली की प्रशंसा हो रही है।

सौम्या मूल रूप से केरल की रहने वालीं है। वो हिमाचल प्रदेश 2010 कैडर की आईपीएस अफसर हैं। सौम्या के पिता इंजीनियर थे। सौम्या अपने पापा-मम्मी की इकलौती बेटी हैं। सोम्या आईपीएस बनने से पहले कई साल तक एचएसबीसी बैंक में एक इनवेस्टमेंट बैंकर के रूप में काम कर रही थी। उन्होंने देश के अलग अलग राज्यों में स्कूलों में पढ़ाई की है।

आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबशिवन ने इसी साल मंडी जिला की 54वें एसपी के रूप में पदभार ग्रहण किया है। आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबशिवन इससे पहले कांगड़ा जिला के सकोह में द्वितीय आईआरबीन में कमांडेंट के पद पर तैनात थी। आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबशिवन ने जिला सिरमौर में बतौर पुलिस अधीक्षक पहला पदभार संभाला था।

सौम्या सांबशिवन मडर मिस्ट्री व ब्लाइंड मर्डर केस को सॉल्व करने में काफी माहिर है। हिमाचल के लोगों में इनकी पहचान लेडी सिंघम के नाम से है। हिमाचल के लोग उनकी कार्यशैली को पसंद करते हैं।

सौम्या जब सिरमौर में एसपी थी तो उस दौरान छेड़छाड़ के मामले काफी अधिक रिपोर्ट हो रहे थे। इस दौरान उन्होंने लड़कियों को पेपर स्प्रे बनाने की ट्रैनिंग भी दी थी। उस वक्त वो काफी चर्चाओं में रही थी और उनकी काफी तारीफ भी हुई थी।

आईपीएस सौम्या सांबशिवन लेखक बनना चाहती थी, लेकिन बाद में उन्होंने आईपीएस बनने की ठान ली। उन्होंने अपने पहले अटेंप्ट में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली। आईपीएस बनने से पहले कई साल तक एचएसबीसी बैंक में एक इनवेस्टमेंट बैंकर के रूप में काम कर रही थी।

सौम्या को किताबें पढ़ने का शौक है। उन्हें लियो टॉल्स्टॉय, , गजानन माधव मुक्तिबोध और प्रेमचंद को पढ़ना पसंद है। लियो टॉल्स्टॉय, ओशो और सलमान रुश्दी उनके पसंदीदा हैं। सौम्या को कविताएं लिखना का भी शौक है।

सिरमौर में उन्होंने एक अंतरराज्यीय ड्रग कार्टेल का भी भंडाफोड़ किया था। उन्होंने दो युवकों को गिरफ्तार किया था जो अमीर परिवारों से आते थे। वे अच्छी तरह से शिक्षित थे, उनके पास विदेशी डिग्रिया थीं। वे नशीली दवाओं की तस्करी के लिए लक्जरी कारों में यात्रा करते थे। इसलिए किसी को उन पर शक नहीं हुआ। आख़िरकार पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने और सलाखों के पीछे डालने में कामयाब रही।