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क्या राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को अनिश्चितकाल के लिए रोक सकते हैं?समझ‍िए क्‍यों उठा सवाल.

 
  • Shubham Sehgal
  • 27 Sep 2023
  • 767
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नई दिल्‍ली: केरल में सीएम पिनराई विजयन और राज्‍यपाल आरिफ मोहम्‍मद खान के बीच ठनाठनी बढ़ गई है। सीएम विजयन राज्‍यपाल के रुख से नाराज हैं। नौबत यह आ गई है कि मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में जाने का माहौल बनने लगा है। सीएम ने गवर्नर पर विधानसभा से पारित विधेयकों पर हस्‍ताक्षर नहीं करने का आरोप लगाया है। साथ ही यह भी कहा है कि राज्‍य सरकार आरिफ मोहम्‍मद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। विजयन का कहना है कि विधानसभा से विस्तृत चर्चा के बाद पारित आठ विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया था। हालांकि, ये विधेयक लंबे समय बाद भी कानून नहीं बन पाए हैं। राज्‍यपाल के पास ये विधेयक संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत भेजे गए थे। इस रस्‍साकशी में एक सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वह यह है कि क्‍या राज्‍यपाल विधानसभा से पारित विधयकों को अनिश्चितकाल तक रोक सकते हैं? आइए, यहां इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

राज्‍य व‍िधेयकों को लेकर राज्‍यपाल की शक्‍त‍ियां
राज्‍य विधेयकों को लेकर राज्‍यपाल के पास कई तरह की शक्तियां होती हैं। इसमें संविधान का अनुच्‍छेद 200 अहम है। यह अनुच्‍छेद विधानसभा से पारित विधेयक को सहमति के लिए राज्‍यपाल के पास भेजने की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसके तहत राज्‍यपाल को ऐसे विधयक को सहमति देने या उसे रोकने या राष्‍ट्रपति को विचार के लिए रिजर्व करने की ताकत देता है। वह विधेयक को वापस भी कर सकते हैं। ऐसा पुनर्विचार का अनुरोध करके किया जा सकता है। वहीं, अनुच्‍छेद 201 में साफ कहा गया है कि जब कोई बिल राष्‍ट्रपति के विचार के लिए रिजर्व या आरक्षित होता है तो वह उस पर सहमति दे सकते हैं या फिर उस पर रोक लगा सकते हैं।

क्‍या है इस पर सुप्रीम कोर्ट का रुख?
इस पर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी जानने की कोशिश करते हैं। शीर्ष अदालत ने तेलंगाना राज्‍य की ओर से दायर एक याचिका में अपने न्‍यायिक आदेश में कहा था कि राज्‍यपाल के पास भेजे गई अहम विधेयकों को लंबित रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि राज्‍यपाल की सहमति के लिए भेजे गए बिलों को जितनी जल्‍दी हो सके वापस कर दिया जाना चाहिए। उन्‍हें रोका नहीं जाना चाहिए। राज्‍यपाल की शिथिलता के कारण विधानसभाओं को अनिश्चितकाल तक इंतजार करना पड़ता है।

सवाल उठा क्‍यों है?
केरल के CM पिनराई विजयन ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार विधानसभा से पारित विधेयकों पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के हस्ताक्षर नहीं करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। विधानसभा से विस्तृत चर्चा के बाद पारित आठ विधेयक संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे गए थे। ये विधेयक लंबे समय बाद भी कानून नहीं बन सके हैं। राज्य सरकार इस मुद्दे पर सिर्फ कानूनी रास्ता अपना सकती है। सरकार ने इस बारे में वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन की राय ली है कि क्या राज्यपाल के पास विधेयकों को मंजूरी दिए बिना अनिश्चितकाल तक रोकने का अधिकार है।

 

 
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