नई दिल्ली: जैसे-जैसे धरती पर शनिवार का दिन गुजर रहा है चांद पर जमे अपने दोनों दूतों को लेकर भारतीयों की चिंता बढ़ती जा रही है। इसरो की तरफ से चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान के साथ संपर्क करने की कोशिशें हो रही हैं लेकिन उधर से कोई सिग्नल नहीं मिला है। कुछ दिन पहले चांद पर अंधेरा छाने के कारण दोनों को स्लीप मोड में डाल दिया गया था लेकिन अब वे उठ नहीं रहे हैं। वैसे इस दौरान उनके रिसीवर चालू रखे गए थे जिससे बाद में संपर्क आसानी से स्थापित किया जा सके। इसरो के साइंटिस्ट अब भी पॉजिटिव सोच रहे हैं कि उन दोनों तक हमारा मैसेज मिलेगा और वे रेस्पांड करेंगे। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि लैंडर और रोवर अगर अनंतकाल के लिए निद्रा में सो जाते हैं तो क्या चंद्रयान-3 मिशन फेल माना जाएगा? इस सवाल का जवाब वैज्ञानिक स्पष्ट रूप से पहले ही दे चुके हैं।

इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक नीलेश देसाई बताते हैं कि लैंडर और रोवर दोनों को स्लीप मोड पर डाला गया था क्योंकि चांद पर रात में तापमान शून्य से 200 डिग्री सेल्सियस तक नीचे यानी माइनस चला जाता है। 20-21 सितंबर से चंद्रमा पर सूर्योदय शुरू हुआ और इसरो को उम्मीद है कि 23 सितंबर तक सौर पैनल और अन्य उपकरण पूरी तरह से चार्ज हो जाएंगे। यही वजह है कि अब लगातार लैंडर और रोवर दोनों को सक्रिय करने की कोशिश हो रही है।



चांद पर सो रहे अपने उन दोनों धुरंधरों को शुक्रिया कहिए। भारत के विक्रम और रोवर को अनंत काल तक याद किया जाएगा। देखिए शिव शक्ति पॉइंट से कितनी दूर घूमा और अब सो रहा है प्रज्ञान।