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5 दिन बीत गए, एक भी मजदूर सुरंग से बाहर नहीं आया...जानिए रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक क्या हुआ?.

 
  • Raghvendra Shukla
  • 16 Nov 2023
  • 1091
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देहरादूनः उत्तराखंड के उत्तरकाशी में दिवाली के दिन बड़ा हादसा हो गया। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन हो गया, जिसकी वजह से करीब 40 लोग घटना स्थल के अंदर फंस गए। उत्तराखंड सरकार और प्रशासन की टीमों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू कर दिया लेकिन 4 दिन बाद भी अभी तक किसी भी मजदूर को बाहर नहीं निकाला जा सका है। टनल के अंदर सभी मजदूर सुरक्षित हैं और उन्हें बचाने की कोशिश लगातार जारी है। आइए जानते हैं, मजदूरों को बचाने के लिए अभी तक क्या-क्या प्रयास किए गए हैं और घटना की बड़ी अपडेट्स क्या-क्या रही हैं-

क्या हुआ था

उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिल्क्यारा से डंडालगांव तक नवयुगा कंपनी की निर्माणाधीन टनल रविवार सुबह 5:30 बजे के लगभग धंस गई थी। इसकी वजह से टनल के मुहाने से लगभग 200 मीटर अंदर भारी मात्रा में मलबा आ गया था। इससे टनल बंद हो गई और टनल के भीतर काम कर रहे लगभग 40 श्रमिक फंस गए। एडीजी कानून व्यवस्था एपी अंशुमान ने बताया कि सिलक्यारा की ओर सुरंग के द्वार से 200 मीटर की दूरी पर भूस्खलन हुआ। सुरंग में जो मजदूर काम कर रहे थे वो द्वार के 2800 मीटर अंदर फंस गए। ये मजदूर बिहार, उड़ीसा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड के रहने वाले हैं। मजदूरों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन तत्काल ऐक्टिव हो गया। राहत और बचाव कार्य के चलते उत्तरकाशी के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी रद्द कर दी गई। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी घटना के संबंध में सीएम पुष्कर सिंह धामी से जानकारी ली और केंद्रीय एजेंसियों को रेस्क्यू के काम में लगने के निर्देश दिए।

भारी मशीनों से रेस्क्यू

घटना के दूसरे दिन भूस्खलन की वजह से इकट्ठा मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया। इसके लिए खुदाई करने वाले उपकरणों और भारी मशीनों की मदद ली गई। साथ ही वॉकी-टाकी के जरिए मजदूरों से बात भी की गई। पानी वाले पाइप के जरिए सुरंग के भीतर ऑक्सीजन और खाने की सप्लाई की गई। सुरंग में फंसे हुए श्रमिकों तक पहुंच बनाने के लिए बचावकर्मी रात भर मलबा हटाने के काम में जुटे रहे। बचाव दलों ने पहले दिन लगभग 15 मीटर भाग से मलबा हटा लिया। असल में टनल में मलबा हटाने के लिए काफी समय लग रहा है क्योंकि थोड़ा सा भी मलबा हटाने पर ऊपर से और मलबा आ रहा है। इसकी वजह से राहत और बचाव दलों को बेहद सावधानी से मलबा हटाने का काम करना पड़ रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी मौके पर जाकर बचाव और राहत कार्य का निरीक्षण किया।

वॉकी-टॉकी से बात

मंगलवार को सुरंग में फंसे मजदूरों से एसडीआरएफ कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने वॉकी टॉकी की जरिये बात की। कमांडेंट ने सबका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बताया कि सभी मजदूर सुरक्षित हैं। सभी को जल्द रेस्क्यू कर लिया जाएगा। पाइपलाइन के जरिये चना, बादाम, ओआरएस, ग्लूकोस और दवाइयां पहुंचाई गई हैं। तीसरे दिन टीम सुरंग में 25 मीटर तक घुसने में कामयाब रही लेकिन लगभग 35 मीटर और मलबा साफ करने का काम बाकी था। सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए एक्सपर्ट्स की टीम ने कई तरीकों पर अमल किया। इसके लिए 900 MM के एमएस स्टील पाइप को मलबे के आरपार करने के लिए काम शुरू कर दिया है।

पर्ची से संवाद

इस दौरान मजदूरों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया। श्रमिकों को पर्ची पर लिखकर संदेश भेजा गया था कि अंदर फंसे सभी लोग सुरक्षित हैं? अंदर से जवाब आया कि उन्हें संदेश मिल गया है और वे सभी लोग ठीक-ठाक हैं। जो खाना उन्हें भेजा गया था वह भी उन्हें मिल गया है और उन्होंने उसे खा लिया है। श्रमिकों ने यह भी कहा कि अगर वह उन्हें सुरक्षित देखना चाहते हैं तो ऑक्सीजन की सप्लाई बनाए रखें क्योंकि अंदर बहुत गर्मी हो रही है और इसके लिए उन्हें हवा की बेहद जरूरत है। इसके बाद अंदर फंसे मजदूरों के लिए कंप्रेसर के जरिए खाद्य सामग्री जैसे, चना, बादाम, बिस्किट, ओआरएस, ग्लूकोज और कुछ दवाइयां भी पहुंचाई गई।

मशीन खराब

रेस्क्यू में प्रयोग में लाई जा रही ऑगर मशीन (ड्रिल मशीन) खराब होने के बाद बुधवार को दिल्ली से उसके पार्ट्स मंगाए गए। हरक्यूलिस विमान से आए हाई पावर मशीन के पार्ट्स विमान में फंस गए। इन पार्ट्स को निकालने के लिए दो घंटे मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद दिल्ली से एक और अधिक शक्तिशाली मशीन मंगाई गई। इस मशीन के जरिए प्रति घंटे 5 मीटर मलबा निकाला गया। रेस्क्यू के लिए नॉर्वे और थाईलैंड की विशेष टीमों की भी मदद ली गई। भारतीय रेल, आरवीएनएल, राइट्स एवं इरकॉन के विशेषज्ञों से भी सुरंग के भीतर ऑपरेशन से संबंधित सुझाव लिए गए।

परिजन से बातचीत

हादसे के चार दिन बाद पुलिस ने फंसे हुए मजदूरों की पाइप के जरिये उनके परिजन से बातचीत करवाई। अंदर फंसे सभी मजदूरों को बताया गया कि बाहर शासन-प्रशासन उनके बचाव में तेजी से जुटा है। मंगलवार को फंसे हुए श्रमिकों की डॉक्टरों से भी बात कराई गई। इस दौरान मजदूरों ने उल्टी और सिरदर्द की शिकायत की। इसके लिए उन्हें मल्टी-विटामिन भेजा गया।

आक्रोशित हो गए परिजन

तीन दिन तक मजदूरों को बाहर नहीं निकाला जा सका तो टनल के बाहर मौजूद उनके परिजन और साथी मजदूरों का धैर्य भी टूट गया। मजूदरों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में ढिलाई का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। श्रमिकों के परिजन ने चेतावनी दी कि अगर अंदर फंसे मजदूरों को जल्द बाहर न निकाला गया तो वे टनल के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रेस्क्यू ऑपरेशन का अपडेट लिया और मुख्य सचिव को अलर्ट रहने का निर्देश दिया।

 

 

 
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