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86 में से 65 नामों को मंजूरी, फिर भी केंद्र से क्यों नाराज है सुप्रीम कोर्ट? जानिए इस बार क्या कहा.

 
  • Naveen Kumar Pandey
  • 21 Oct 2023
  • 1153
image  

 

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर फिर से आपत्ति जताई है कि केंद्र सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों को ज्यों का त्यों नहीं मानती है बल्कि नामों की लिस्ट में से कुछ को चुन लेती है और कुछ पर हमेशा के लिए चुप्पी ठान लेती है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि और शीर्ष अदालत और हाई कोर्टों में जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की तरफ से अनुशंसित नामों में से 'पिक एंड चूज' की प्रथा स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे परेशानी होती है। जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि सरकार को भेद नहीं करना चाहिए क्योंकि नामों की सिफारिश कॉलेजियम की तरफ से जजों की वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए की जाती है और नामों में छंटनी वरिष्ठता की प्रणाली बिगाड़ देती है। यह तीन सदस्यी बेंच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की तरफ से अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में केंद्र की ओर से देरी पर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी।

10 जजों की नियुक्ति, 11 के ट्रांसफर पर फैसला अटका

सुनवाई की शुरुआत में केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बलबीर सिंह ने सरकार के विचाराधीन सभी लंबित नामों पर फैसला करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। ऐसे 21 नाम हैं जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए सरकार के विचाराधीन हैं। उच्च न्यायालय के लिए नियुक्ति के लिए दस नाम हैं- पांच नाम जिन्हें कॉलेजियम ने दोबारा केंद्र के पास भेजा था और पांच को पहली बार भेजा गया था। इनके अलावा 11 जजों का ट्रांसफर किया जाना है।


 

"चिंता इस बात को लेकर है कि नामों में कुछ को चुना जा रहा है और कुछ को छोड़ा जा रहा है। इससे वरिष्ठता प्रभावित हो रही है। कुछ का ट्रांसफर किया जा रहा है और कुछ का नहीं।

      सुप्रीम कोर्ट"

सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को दी थी चेतावनी


पीठ ने इस बात पर भी असंतोष व्यक्त किया कि पिछले कुछ हफ्ते पहले दी गई चेतावनी के बावजूद केंद्र सरकार ने फैसला लेने में फुर्ती नहीं दिखाई। सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि सरकार को और ज्यादा धक्का देने की जरूरत है। उसने सुनवाई को 7 नवंबर के लिए स्थगित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 26 सितंबर को केंद्र को कहा था कि उसके पास कॉलेजियम की तरफ से जिन 86 जजों के नाम भेजे गए हैं, उन पर कोई फैसला लेकर आए वरना समस्या का सामना करने को तैयार रहे।


 

"कलीजियम की सिफारिश के बाद क्या प्रक्रिया चल रही है, इस बारे में वह अगली सुनवाई में कोर्ट को अवगत कराएं। इस दौरान एडवोकेट दुष्यंत दवे ने कहा कि कई यंग वकील बेंच में जाना नहीं चाहते, क्योंकि नाम अटके रहते हैं।

बलबीर सिंह, एएसजी"

86 में 65 नामों को केंद्र ने किया क्लियर

ध्यान रहे कि जिन 86 नामों के अलावा 26 हाई कोर्टों के जजों के ट्रांसफर और एक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति की भी सिफारिश की थी।
इसके बाद, सरकार ने अपने फैसलों में तेजी लाई, फिर भी उसके पास 86 में से 21 नामों पर फैसला नहीं हो सका है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी पर कहा कि केंद्र सरकार पिक एंड चूज की प्रथा पर चलती है जो परेशानी पैदा करने वाली है।

 

 
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