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भारत-रूस व्यापार के लिए कांटा बनी चीन की करेंसी, दोस्त पुतिन को चाहिए युआन, क्या सफल होगी ड्रैगन की चाल?.

 
  • Yogendra Mishra
  • 21 Oct 2023
  • 851
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मॉस्को: रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद से ही पूरी दुनिया ने रूसी तेल से किनारा कर लिया। लेकिन रूस से भारत डिस्काउंट में तेल खरीदने लगा। सालभर बाद अब रूस भारत से तेल का भुगतान चीनी मुद्रा युआन में करने के लिए कह रहा है। भारत इससे बच रहा है। रॉयटर्स ने इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से कहा कि सरकार के नियंत्रण वाली रिफाइनरी भुगतान चीनी मुद्रा में नहीं करना चाहती। इस कारण कम से कम सात कार्गो का भुगतान रुका है। हालांकि पेमेंट में समस्या के बीच अभी भी डिलीवरी नहीं रुकी है।

रूसी कंपनियां जैसे रोसनेफ्ट भारतीय रिफाइनरियों को अभी भी तेल दे रही हैं। लेकिन पेमेंट के दूसरे तरीके खोजे जा रहे हैं। रूस ने जब से यूक्रेन पर हमला किया है तब से पश्चिमी देशों ने रूस से तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। भारत में क्योंकि तेल की डिमांड ज्यादा है, इस कारण भारत रूस से डिस्काउंट तेल खरीद रहा है। हालांकि समस्या ये है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल की कीमत की सीमा लगा दी है।

रिफाइनरियों को अमीराती दिरहम जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। क्योंकि यूक्रेन के आक्रमण के बाद इनकी कीमतें बढ़ गईं। भारतीय रिफाइनरियों ने जुलाई में कुछ तेल के भुगतान के लिए चीनी युआन का इस्तेमाल शुरू किया था। हालांकि रिफाइनरियां अभी भी अधिकांश रूसी तेल खरीदने के लिए दिरहाम का इस्तेमाल कर रही हैं। सात कार्गो का भुगतान अभी भी बचा हुआ है। भारतीय रिफाइनरियां अपना ज्यादातर तेल रूसी व्यापारियों और कुछ रूसी संस्थाओं से खरीदती हैं। लेकिन रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि भारतीय व्यापारी दिरहम में सौदे के लिए तैयार है, लेकिन रूसी विक्रेता युआन ही चाहते हैं।

रूस का युआन पर जोर क्यों?
 

भारतीय कंपनिया रूसी तेल के भुगतान के लिए रुपए का इस्तेमाल पसंद करती हैं। रिजर्व बैंक ने पिछले साल रूपया-रूबल में ट्रेड के लिए एक तंत्र की घोषणा की थी। लेकिन रुपए की मांग ग्लोबल लेवल पर इतनी नहीं है कि रूस उसका इस्तेमाल बाकी कामों में कर सके। रूस रुपए को ज्यादातर भारत के साथ व्यापार में ही इस्तेमाल कर सकता है। ब्लूमबर्ग के एक लेख के मुताबिक रूस के पास अरबों रुपए हैं, लेकिन वह उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। इसके साथ रूस पर क्योंकि यूरोप और अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं, इसलिए पुतिन एक ऐसी मुद्रा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहते हैं जो डॉलर को टक्कर दे सके।

 

भारत नहीं चाहता युआन का इस्तेमाल
 

रिपोर्ट के मुताबिक भारत युआन का इस्तेमाल नहीं करना चाहता। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि क्या सरकार ने युआन में पेमेंट न करने को कहा है? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'इस पर प्रतिबंध नहीं है, अगर किसी प्राइवेट कंपनी के पास व्यापार करने के लिए युआन है तो सरकार इसे नहीं रोकेगी। लेकिन इस तरह के व्यापार को न तो प्रोत्साहित किया जाएगा और न ही सुविधा दी जाएगी।' भारत क्योंकि अपनी मुद्रा रुपए को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना चाहता है। इसलिए वह युआन से दूरी बनाए हुए हैं।

 



 

 

 

 
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