देहरादून: उत्तराखंड (Dehradun News) में हाल ही में जंगली जानवरों का दखल इंसानी बस्तियों में बढ़ा है। इनमें तेंदुए, बाघ, जंगली हाथी और भालू तो थे ही जंगली सुअर, बंदरों और लंगूरों ने खासा परेशान कर रखा है। इनमें भी जंगली हाथी, जंगली सुअर, बंदर और लंगूरों की समस्या इसलिए बड़ी है क्योंकि ये फसल का नुकसान कर रहे हैं। यह आर्थिक नुकसान स्थानीय नागरिकों के लिए बड़ी चिंता की बात है।
इससे बचने के लिए वन्य पशु जानकारों ने कुछ सुझाव दिए हैं। असल में इंसान और जंगली जानवरों में बढ़ रहे संघर्ष के पीछे इंसान का जंगल के हिस्से में लगातार बढ़ रहा अतिक्रमण ही है। बहरहाल, जंगली हाथी, सुअर, बंदर और लंगूरों के उत्पात को रोकने के लिए कुछ सुझावों पर काम किया गया है। ये कारगर भी साबित हुए हैं।
इसमें 20-20 मीटर की दूरी पर खंभे गाढे़ जाते हैं। इनके बीच में तार की फेंसिंग होती है। इन तारों में सोलर एनर्जी से पैदा हुई बिजली प्रवाहित की जाती है। लेकिन इनमें महज 12 वोल्ट का करंट होता है। यह करंट इतना होता है कि जानवर को झटका भर लगे लेकिन उसे गंभीर शारीरिक नुकसान न हो, या उसकी जान न जाए। इससे जानवर यह फेंसिंग पार नहीं करता। यह हाथियों, नीलगाय और जंगली सुअरों के लिए काफी कारगर साबित होती है। बंदर और लंगूर भी इससे दूर रहते हैं।
हाथी खाई हाथी के बस्तियों में होने वाले उत्पात को रोकने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। इसके लिए बस्ती के आसपास दो मीटर गहरी, तीन मीटर चौड़ी खाइयां खोदी जाती हैं। इनके ऊपर पथर की पटियां या लकड़ी का पुल बनाया जाता है। इनसे जनता तो आसानी से पार कर लेती है लेकिन हाथी इस खाई को पार नहीं कर पाते। ये खाइयां रेतीली जगहों पर नहीं बनाई जातीं। ये इस तरह खोदी जाती हैं कि 10 फीट दूर से दिखाई दे जाएं ताकि भूल से कोई इनमें गिर नहीं जाए। इसके अलावा इनसे खोदी मिट्टी दूर फेंकी जाती है ताकि हाथी इसे वापस खाई में डालकर पार न कर जाएं। जहां खाई नहीं बनाई जा सकती है वहां करंट वाली फेंसिंग लगाई जाती है।
रामबांस एक कैक्टस की तरह दिखने वाला अमेरिकी मूल पौधा है। यह जंगली जानवरों को घुसपैठ करने से रोकता है। इसे मुख्यत: खेतों की मेड़ों पर लगाया जाता है। इसमें नुकीले कांटे होते हैं जिनसे जंगली जानवर अंदर नहीं जा पाते। इसका दूसरा लाभ यह है कि इनसे मजबूत प्राकृतिक रेशा भी निकलता है। इसका इस्तेमाल रस्सी वगैरह बनाने और औद्योगिक क्षेत्र में भी होता है।
एक और अहम उपाय है जंगल में फलदार पौधों और वृक्षों का रोपण। असल में बंदर, लंगूर और दूसरे जंगली जानवर भोजन की तलाश में जंगल छोड़कर इंसानी बस्ती में आ रहे हैं। जंगल में इंसानी अतिक्रमण ने उनके भोजन के साधन सीमित कर दिए हैं। लेकिन अगर उन्हें जंगल में भी फल वगैरह भोजन सामग्री मिलेगी तो वह गांवों और शहरों में आने का जोखिम नहीं उठाएंगे।