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  • डॉ. अम्बेडकर को संविधान का निर्माता क्यों कहा जाता है? बाबा साहेब की ये कहानी अनसुनी सी रह गई

डॉ. अम्बेडकर को संविधान का निर्माता क्यों कहा जाता है? बाबा साहेब की ये कहानी अनसुनी सी रह गई.

 
  • Rajesh Choudhary
  • 27 Nov 2023
  • 1077
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नई दिल्ली: 26 नवंबर... वो तारीख जिसे देशभर में संविधान दिवस के रूप में जाना जाता है। आज के ही दिन यानी 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अपनाया था। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ। संविधान के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। ये वो बातें हैं, जो स्कूल-कॉलेज में आपने जरूर सुनी होगी। हम सब ये भी जानते हैं कि डॉ भीवराव आंबेडकर को संविधान निर्माता माना जाता है। वो संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष थे। लेकिन बहुत कम लोगों को ये बात पता है कि संविधान का मसौदा तैयार करने का बोझ केवल आंबेडकर पर आ गया था। ये बात प्रारूप समिति के ही सदस्य टीटी कृष्णामाचारी ने संविधान सभा के सामने कही थी। ये कहानी पढ़कर आप समझ जाएंगे कि संविधान का निर्माता डॉ आंबेडकर को क्यों कहा जाता है।

संविधान का ड्राफ्ट बनाने के लिए बनी थी 7 सदस्यों की कमेटी

हम जानते हैं कि प्रारूप समिति ने मई 1947 में संविधान सभा के सामने मसौदा पेश किया था। इस ड्राफ्ट में 7,500 से ज्यादा संशोधन सुझाए गए, जिनमें से लगभग 2,500 को स्वीकार किया गया। संविधान सभा का मसौदा तैयार करने के लिए 7 सदस्यों की ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई गई थी। इस ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ आंबेडकर थे। वहीं कमेटी के सदस्य कन्हैयालाल मुंशी, मोहम्मद सादुल्लाह, अल्लादि कृष्णस्वामी अय्यर, गोपाळ स्वामी अय्यंगार, एन. माधव राव और टीटी कृष्णामचारी थे।

केवल आंबेडकर पर आ गई सारी जिम्मेदारी

जब संविधान का ड्राफ्ट बनाने की बात आई, तो 7 सदस्यों में से सिर्फ आंबेडकर ही मौजूद थे। इस घटना का जिक्र ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य टी.टी कृष्णामचारी ने संविधान सभा में किया। टीटी कृष्णामाचारी ने नवंबर 1948 में संविधान सभा में कहा कि 'मृत्यु, बीमारी और अन्य व्यस्तताओं' की वजह से कमेटी के ज्यादातर सदस्यों ने मसौदा बनाने में पर्याप्त योगदान नहीं दिया। इसके चलते संविधान तैयार करने का बोझ डॉ आंबेडकर पर आ पड़ा।

अकेले आंबेडकर ने तैयार किया मसौदा!

दरअसल, संविधान सभा की प्रारूप समिति में जिन सात लोगों को रखा गया उनमें से एक सदस्य बीमार हो गए, दो दिल्ली के बाहर थे, एक विदेश में थे, एक ने बीच में इस्तीफा दे दिया वहीं एक सदस्य ने जॉइन नहीं किया। इस तरह से सात सदस्यों वाली कमेटी में केवल आंबेडकर के कंधों पर संविधान का ड्राफ्ट बनाने की सारी जिम्मेदारी आ गई। आकाश सिंह राठौर की किताब 'आंबेडकर्स प्रिएंबल: ए सीक्रेट हिस्ट्री ऑफ़ द कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ़ इंडिया' में इसका उल्लेख है कि ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठकों में सभी सदस्य मौजूद नहीं रहे। जबकि डायबिटीज और ब्लड प्रेशर से पीड़ित होने के बाद भी आंबेडकर ने संविधान तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इतना ही नहीं आंबेडकर ने करीब 100 दिनों तक संविधान सभा में खड़े होकर संविधान के पूरे ड्राफ्ट को धैर्यपूर्वक समझाया और हर एक सुझाव पर विमर्श किया।

 

 

 
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