नई दिल्ली: 'बंद जगह में घबराहट नहीं होती... हम लोग इससे कहीं छोटे और संकरे पाइपों में काम कर चुके हैं।' 800 मिलीमीटर के पाइप में घुसने से पहले प्रसाद लोदी का यह आत्मविश्वास सब जाहिर कर देता है। प्रसाद आला दर्ज के रैट माइनर हैं। वह और उनके जैसे 5 और माइनर्स अपनी जान दांव पर लगाकर उन 41 मजदूरों की जिंदगी बचाने में लगे रहे, जो 12 नवंबर से सिलक्यारा सुरंग में फंसे थे। इन रैट माइनर्स का ट्रैक रिकॉर्ड गजब है और यह बात साबित भी हो गई। प्रसाद बताते हैं कि वह तो 600mm के पाइप में बैठकर काम कर चुके हैं। उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू में उनकी दिलेरी ने उम्मीदों को पंख दिए हैं। रेस्क्सू साइट पर उनकी एंट्री कुछ वैसे ही हुई, जैसे फिल्म में हीरो की होती है। सब मामला फंस जाने पर हीरो आता है और सब ठीक कर देता है। उत्तरकाशी की सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने में इन माइनर्स की भूमिका किसी नायक सरीखी ही है। इनकी मेहनत रंग लाई! तमाम बड़े नामों के बीच इन्हें जरूर याद करिए। यही हैं, उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के 'असली हीरो।'


अंदर रैट माइनर्स रास्ता बना रहे थे, बाहर सुरंग में फंसे मजदूरों के परिजन बाहर डेरा डाले थे। जिस तरह एक-एक दिन निकलता जा रहा था, वे सुबह-शाम उनकी सलामती की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। गंगा घाटी के भंडार स्यूं पट्टी, दसगी पट्टी, बिष्ट पट्टी, यमुना घाटी के मुगरसंती, बड़कोट पट्टी के आराध्य देव बाबा बौखनाग हैं। इसलिए टनल के ऊपरी हिस्से पर उनका अस्थायी मंदिर बनाया गया है।