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जोशीमठ आपदा के लिए 1658 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत, जानिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तीन साल की योजना.

 
  • Dhirender Singh
  • 01 Dec 2023
  • 969
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देहरादून: उत्तराखंड का जोशीमठ नगर धंसना शुरू हुआ था तो देशदुनिया में इस खबर ने तहलका मचा दिया था। तमाम भू वैज्ञानिक जोशीमठ में जुटे और आज तक जोशीमठ शहर में शोध चल रहा है। इस भीषण आपदा से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति ने जोशीमठ के लिए 1658.17 करोड़ रुपये की रिकरवरी एंड रिकंस्ट्रक्शन (R&R) योजना को मंजूरी दी है।

अब इस योजना के तहत, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) की रिकवरी एंड रिकंस्ट्रक्शन विंडो से 1079.96 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी जाएगी। राज्य सरकार राहत के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से 126.41 करोड़ रुपये और राज्य के बजट से 451.80 करोड़ रुपये प्रदान करेगी, जिसमें पुनर्वास के लिए 91.82 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण लागत भी शामिल है।

धर्मिक स्थलों पर छाया संकट

जोशीमठ शहर बदरीनाथ धाम, फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यात्रा सीजन से पहले जब जोशीमठ में भूस्खलन और मकानों में दरारों ने विकराल रूप ले लिया था। तब बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर भी संकट के बादल छाने लगे थे। हालांकि यात्रा काल शुरू होने से पहले ही दरारों का बढ़ना रूक गया था और यात्रा सुचारू और सुरक्षित पूरी हुई।

तीन साल के लिए योजना

उत्तराखंड का जोशीमठ भूस्खलन और जमीन धंसने से प्रभावित हुआ। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को सभी आवश्यक तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और एनडीएमए के मार्गदर्शन में सभी तकनीकी एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई कर जोशीमठ के लिए रिकवरी योजना तैयार करने में राज्य सरकार की मदद की है। जोशीमठ के लिए रिकवरी योजना को बैस्ट प्रैक्टिसिस, बिल्ड बैक बेटर (BBB) सिद्धांतों और सस्टेनेबीलिटी इनिशिएटिवस का पालन करते हुए तीन वर्षों में लागू किया जाएगा। इसके बाद जोशीमठ पारिस्थितिक स्थिरता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरेगा।

मिश्रा समिति की रिपोर्ट की अनदेखी

जोशीमठ शहर में घरों की दीवारों और इमारतों में दरार पड़ने की घटना पहली बार वर्ष 2021 में दर्ज की गई थी। इसने आगे चल कर विकराल रूप ले लिया। तमाम रिपोर्ट के अनुसार 2022 में जोशीमठ शहर में दरारें एकाएक तेजी से बढ़ने लगी। साल 1976 की मिश्रा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जोशीमठ मुख्य चट्टान पर नहीं बल्कि रेत और पत्थर के जमाव पर बसा हुआ है। यह एक बेहद पुराने भूस्खलन क्षेत्र पर स्थित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अलकनंदा और धौलीगंगा की नदी धाराओं द्वारा कटाव भी भूस्खलन के कारण बने। समिति ने भारी निर्माण कार्य, ब्लास्टिंग या सड़क की मरम्मत के लिए बोल्डर हटाने और अन्य निर्माण, पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी, लेकिन मिश्रा समिति की चेतावनी पर कोई गौर नहीं किया गया।

तीन हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

जोशीमठ में आई इस आपदा के कारण लगभग तीन हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। जिनमें से 66 परिवारों ने अपना शहर ही छोड़ दिया। जबकि 561 घरों में दरारें के कारण घर रहने लायक ही नहीं रहे। कई घर तो ऐसे हैं, जिनमें घुसने का मतलब अपनी ही जान को जोखिम में डालना है। ऐसे में कई परिवार अब इन जर्जर घरों में लौटने की बजाए किराये के घरों में रहने को मजबूर हैं।

भूकंप नहीं थी वजह

वहीं वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने जोशीमठ में 11 सीस्मिक स्टेशन (पैन्का, औली रोड सुनील, मारवाड़ी, भौना सुनील, हेलंग, मेराग, थंग, रविग्राम, अपर बाजार, तपोवन, गुरुगंगा) स्थापित किए हैं। ये स्टेशन ब्रॉडबैंड के माध्यम से देहरादून स्थित संस्थान में स्थापित कंट्रोल रूप को रियल टाइम जानकारी भेजते हैं। यह स्टेशन एक मैग्नीट्यूड तक के सूक्ष्म भूकंप तक को रिकॉर्ड करने में सक्षम है। सीस्मिक स्टेशनों से प्राप्त डाटा के आधार पर संस्थान इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है कि जोशीमठ भूधंसाव में भूकंप की भूमिका नहीं थी।

16 बार आए भूकंप

संस्थान के विज्ञानियों ने 13 जनवरी से 12 अप्रैल के बीच आए भूकंपों को रिकॉर्ड किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में जोशीमठ के 50 किमी के दायरे में 1.5 मैग्नीट्यूड के 16 बार भूकंप रिकॉर्ड किए गए। इसे विज्ञानियों ने इस भूकंपीय जोन के लिहाज से सामान्य माना है। भूमि खिसकने और दरारें पड़ने का मुख्य कारण जोशीमठ के ऊंचे ढलान पर जल विज्ञान या भूजल असंतुलन सामने आया है।

 

 
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