नई दिल्ली: पुणे का आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (AFMC) इस साल अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। शुक्रवार को प्लैटिनम जुबिली इयर सेलिब्रेशन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिरकत की। उन्होंने AFMC के 75 साल के गौरवशाली इतिहास को सराहनीय करार दिया। मुर्मू ने इस मौके पर पुणे के कॉलेज को 'प्रेसिडेंट्स कलर' से सम्मानित किया। इसे 'राष्ट्रपति का निशान' के नाम से भी जाना जाता है। किसी सैन्य इकाई को दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह वो 'निशान' है जो किसी यूनिट की शान बढ़ा देता है। यह सम्मान 75 साल से ज्यादा समय से देश के प्रति कॉलेज की निरंतर सेवा का सबूत है। AFMC प्रमुख सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा प्रतिष्ठान है। यह देश के अग्रणी मेडिकल कॉलेजों में से एक है। पद्म सम्मान का जिक्र अक्सर आता है। लोग इनके बारे में जानते भी हैं। लेकिन, 'राष्ट्रपति का निशान' क्या होता है, इसके बारे में अभी ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है। आइए, यहां इसके बारे में सबकुछ जानते हैं।
क्या होता है 'राष्ट्रपति का निशान'?

प्रेसिडेंट्स कलर अवार्ड भारत की किसी भी सैन्य इकाई को दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है। इस सम्मान को 'राष्ट्रपति का निशान' के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रतीक होता है। इसे सभी यूनिट के अधिकारी अपनी यूनिफॉर्म के बाएं हाथ की आस्तीन पर लगाते हैं। भारत में राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। यह सम्मान उन्हीं के हाथों दिया जाता है। इससे किसी यूनिट के उत्कृष्ठ प्रदर्शन का पता चलता है। वैसे तो जंग में 'निशान' ले जाने की परंपरा बंद हो गई है। लेकिन, सशस्त्र बलों में 'निशान' प्राप्त करने, उसे धारण करने और परेड करने की परंपरा आज भी है। प्रेसिडेंट्स कलर आज भी किसी यूनिट के लिए बहुत मायने रखता है। अगर यूनिट अपने 'निशान' खोती है तो यह उसके लिए अपमान होता है। अगर यूनिट ने दुश्मन के 'कलर' पर कब्जा कर लिया तो यह उस इकाई के लिए बड़ा सम्मान होता है।
वेदों-पुराणों से जुड़ी है परंपरा
भारतीय संदर्भ में 'कलर' या 'स्टैंडर्ड्स' को 'ध्वज या पताका' भी कहा जाता है। ध्वज की अवधारणा की जड़ें 'वेदों' और 'पुराणों' में भी हैं। राजा या सम्राट की सेनाओं में भी 'ध्वज' होते थे। अगर सेना शत्रु के हाथों अपना ध्वज खो देती थी तो उसका अर्थ अपमान होता था। इसके उलट अगर सेना शत्रु के ध्वज पर कब्जा कर लेती थी तो इसका मतलब सम्मान होता था। इसी तरह अगर सेना राजा या सम्राट का ध्वज स्वीकार कर लेती है तो इसका मतलब होता था कि सेना ने उस राजा या सम्राट की सर्वोच्चता को स्वीकार कर लिया है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने की सराहना

राष्ट्रपति ने उन सभी पूर्व कर्मचारियों और अधिकारियों की सराहना की जिन्होंने अब तक एएफएमसी की प्रगति में निरंतर सेवा के जरिये योगदान दिया है। मुर्मू ने इस संस्थान से स्नातक करने वाली महिला अधिकारियों को सशस्त्र बलों में वरिष्ठ पदों पर आसीन होने वाली पहली महिला अधिकारी बताया जो अन्य महिलाओं के लिए आदर्श हैं। उन्होंने एएफएमसी से अपनी सेवाओं की गुणवत्ता को और बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों का उपयोग करने की अपील की। राष्ट्रपति ने कोरोना काल में इस कॉलेज के बहादुर कर्मचारियों के कामों की भी सराहना की। इसके बाद राष्ट्रपति ने एक विशेष डाक टिकट और 75 रुपये का सिक्का भी जारी किया।