नई दिल्ली: देश में सैटेलाइट टोल सिस्टम लागू होने की स्थिति में भी NHAI के सामने टोल चोरी रोकने की चुनौती है। इस दिशा में NHAI योजना बना रहा है। मामले में केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वैसे तो दुनिया के कितने ही देशों में सैटलाइट से टोल वसूला जाता है लेकिन भारत का मामला जरा अलग है। यहां मौजूदा समय में टोल प्लाजा होने के बावजूद भी चार से पांच फीसदी लोग टोल नहीं देते। कई मामलों में तो टोल प्लाजा पर बैठे कर्मचारियों और गाड़ी वालों के बीच हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। अब जबकि सैटलाइट टोल सिस्टम में तो टोल प्लाजा भी नहीं होंगे तो टोल चोरी करने वालों को कौन पकड़ेगा? टोल रोड का इस्तेमाल करने के बावजूद टोल ना देने वालों से टोल की वसूली कैसे होगी? इन आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि इसके लिए सख्त नियम बनाने होंगे, जिनमें टोल चोरी करने वालों के भी चालान काटे जा सकें या इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। ऐसी व्यवस्था हो कि यदि किसी गाड़ी चलाने वाले के टोल अकाउंट में पैसा ही नहीं हो या किसी अन्य तरीके से टोल कटने में बाधा होती हो तो उस व्यक्ति की गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के हिसाब से चालान काटा जा सके।
यूं तो देश में सैटलाइट टोल सिस्टम शुरू होने से लोगों को काफी फायदा पहुंचने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, इससे सरकारी खजाने को कुछ समय के लिए हानि भी हो सकती है। ऐसे में एनएचएआई एक्सपर्ट की मदद ले रहा है ताकि टोल रोड का बड़ा या छोटा, कोई भी हिस्सा इस्तेमाल करने वालों से दूरी के हिसाब से टोल वसूला जा सके। सूत्रों का कहना है कि अभी इसमें एक समस्या और आती दिख रही है कई टोल रोड के करीब सर्विस रोड का होना, जिन पर काफी लोकल ट्रैफिक होता है। अगर सैटलाइट सिस्टम ने सर्विस रोड पर चलने वालों को टोल रोड या सर्विस रोड के किनारे टोल रोड पर चलने वालों को सर्विस रोड पर चलता हुआ मान लिया तो भी ऑटोमैटिक टोल कलेक्शन सिस्टम में दिक्कतें हो सकती हैं। इन सभी आगामी दिक्कतों को दूर करने पर एनएचएआई अभी से काम कर रहा है।