नई दिल्ली : मोदी लहर पर सवार होकर BJP ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बड़ी जीत दर्ज कर ली है। मध्य प्रदेश में जहां BJP ने सत्ता में वापसी की है। वहीं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया है। वहीं, कांग्रेस ने तेलंगाना में BRS को कुर्सी से उतार दिया है। नतीजों के बाद अब BJP में नई दौड़ शुरू हो गई है। यह दौड़ है मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने की। BJP के इन तीनों ही राज्यों में पुराने और अनुभवी चेहरे हैं लेकिन सवाल ये है कि BJP पुरानों पर भरोसा जताएगी या फिर नए चेहरों को सामने लाएगी। वैसे BJP ने जिस तरह बंपर जीत दर्ज की है और BJP के ट्रैक रेकॉर्ड को देखते हुए इसकी संभावना ज्यादा लगती है कि BJP नई लीडरशिप तैयार कर सकती है। BJP का केंद्रीय नेतृत्व हमेशा ही नए और युवाओं को जिम्मेदारी देने की बात करता रहा है। वहीं, तेलंगाना में कांग्रेस का चेहरा कौन होगा, सवाल यह भी है:

राजस्थान में रिवाज कायम रखते हुए BJP ने जीत दर्ज की है। यहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे साल 2003 से ही BJP का चेहरा रही हैं, लेकिन इस चुनाव में BJP ने किसी को चेहरा नहीं बनाया। क्या वसुंधरा को सीएम बनाया जाएगा? वैसे पिछले पांच साल में केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी जो खींचतान रही है उससे इसकी संभावना कम जरूर लगती है। BJP ने सांसद दीया कुमारी को भी यहां चुनाव लड़वाया और सेफ सीट से चुनाव में उतारा था। क्या यह BJP की रानी (वसुंधरा) की जगह रानी (दीयाकुमारी) को बैठाने की तैयारी है। इस पर चुनाव के दौरान भी खूब चर्चा हुई। दीया कुमारी को मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। अलवर से सांसद बालकनाथ का नाम भी चल रहा है, BJP ने इन्हें भी तिजारा सीट से चुनाव लड़वाया। बालकनाथ नाथ संप्रदाय से आते हैं। वही संप्रदाय जिससे उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ आते हैं। बालकनाथ रोहतक के बाबा मस्तनाथ मठ के महंत हैं और उन्हें राजस्थान का योगी भी कहा जाता है। वैसे मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की यहां कोई कमी नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष सी. पी. जोशी से लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल से लेकर किरोणी लाल मीणा तक के नाम चर्चा में हैं। हालांकि BJP में मजाक में यह भी कहा जाता है कि जिसका नाम चला, समझो उसका नाम कटा

शिवराज सिंह ने टफ पिच पर जगह बनाई और BJP ने मध्य प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की है। हालांकि, BJP ने चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर लड़ा था। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि जब शिवराज के नाम पर चुनाव नहीं लड़ा गया था तो क्या BJP उन्हें मुख्यमंत्री बनाएगी? अगर BJP ने असम का मॉडल फॉलो किया तो यह मामा के लिए झटका हो सकता है। BJP अगर बहुमत के आंकड़े के आसपास ही होती तो शिवराज के सीएम बनने की ज्यादा संभावना होती, लेकिन इस प्रचंड बहुमत के साथ BJP के पास प्रयोग करने का पूरा मौका है। यह भी कहा जा रहा है कि क्या BJP लोकसभा चुनाव से पहले प्रयोग करेगी? मुख्यमंत्री बनने के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी चल रहा है। हालांकि, उनका पुराना कांग्रेसी होना आड़े आ सकता है क्योंकि पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ सकती है और BJP नहीं चाहेगी कि लोकसभा चुनाव से पहले कुछ खलबली मचे। इस दौड़ में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है। चर्चा में कैलाश विजयवर्गीय से लेकर प्रदेश अध्यक्ष वी. डी. शर्मा का नाम भी है। OBC नेता के तौर पर प्रह्लाद पटेल से लेकर आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम भी लिया जा रहा है। हालांकि, BJP ने कई मौकों पर दिखाया है कि वे ऐसे नाम को सामने लाती है जिसकी कहीं चर्चा ही नहीं हो रही होती।

छत्तीसगढ़ में भी BJP ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ा और जीत का श्रेय भी मोदी और मोदी की गारंटी को ही जा रहा है। यहां रमन सिंह 2003 से लेकर 2018 तक BJP के मुख्यमंत्री रहे और इस बार भी चुनाव जीते हैं। हालांकि, BJP फिर से उन्हें मौका देगी इस पर संशय भी है। मुख्यमंत्री पद के लिए प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव का नाम भी आगे बताया जा रहा है। वह OBC नेता हैं और OBC समुदाय के साहू समाज से आते हैं। छत्तीसगढ़ में साहू समाज की आबादी करीब 12 फीसदी है। केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह के नाम की भी चर्चा चल रही है। वह आदिवासी समुदाय से आती हैं और इस बार BJP ने उन्हें विधानसभा चुनाव लड़वाया। आदिवासी नेता लता उसेंडी का नाम भी दौड़ में बताया जा रहा है।