नई दिल्ली : भारत की मेजबानी में ग्लोबल साउथ समिट का आयोजन होने जा रहा है। जी-20 की मेजबानी के बाद भारत की कूटनीति में यह सम्मेलन काफी अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी शुक्रवार को इस समिट का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी अपनी इस कूटनीति के जरिये चीन को काउंटर करने की भूमिका तैयार कर रहे हैं। दरअसल भारत, जी-20 समिट के अलावा ब्रिक्स में भी ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज उठाता रहा है। अब ग्लोबल साउथ समिट की मेजबानी कर उन्हें अपने पाले में करना चाहते हैं।
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है, जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित देशों के रूप में जाना जाता है। ये देश मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं। इनमें से कई देश 1960 और 1970 के दशक तक पश्चिमी यूरोपीय औपनिवेशिक का हिस्सा रह चुके हैं। ग्लोबल साउथ दुनिया की 85 फीसदी से अधिक आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 40 फीसदी का प्रतिनिधित्व करता है।
भारत को पूरी दुनिया में ग्लोबल साउथ का नेता माना जाता है। भारत वैश्विक मंज पर ग्लोबल साउथ की आवाज बन चुका है। जनवरी 2023 में भारत ने पहली बार वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट की मेजबानी की। दूसरी तरफ चीन ग्लोबल साउथ के नेता के तौर पर भारत को हटाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। ऐसे में भारत अगर दूसरी बार ग्लोबल साउथ समिट की मेजबानी कर रहा है तो चीन का फ्यूज उड़ना तय है। शीत युद्ध की समाप्ति तक चीन ग्लोबल साउथ के सदस्य देश था। इसके बाद चीन ने आर्थिक रूप से खूब तरक्की की। ऐसे में चीन ग्लोबल साउथ का सदस्य नहीं है। हालांकि, वह खुद को ग्लोबल साउथ के नेता के तौर पर स्थापित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाता रहा है।