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सरिया जाल में फंसी अमेरिकी मशीन, अब इस योजना से बाहर आएंगे 41 श्रमिक .

 
  • Vaibhav Pandey
  • 26 Nov 2023
  • 1072
image  

 

 

देहरादून: उत्‍तरकाशी टनल हादसे को आज 14 दिन बीत चुके हैं पर अब तक अंदर फंसे 41 मजूदूरों को बाहर निकालने में सफलता नहीं मिल पाई है। विशालकाय अमेरिकी ऑगर मशीन अब तक 47 मीटर की ड्रिलिंग कर ली है। करीब 15 मीटर की खोदाई अभी बाकी है। मशीन के आगे बार-बार लोहे की चीजें आने से काम प्रभावित हो रहा है। शुक्रवार दोपहर के बाद से अब तक ड्रिलिंग का काम शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में मजदूरों को बाहर निकालने का इंतजार और लंबा होता जा रहा है। रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन में जुटी टीमें अब सुरंग में वर्टिकल ड्रिलिंग की तैयारी कर रही हैं। टीमें सिल्‍क्‍यारा सुरंग के ऊपर पहाड़ी पर पहुंच गई हैं। सीमा सड़क संगठन के जवानों को कहा गया है कि वे ड्रिलिग मशीन को ऊपर पहाड़ पर पहुंचाएं। इसके लिए सड़क तैयार कर ली गई है। थोड़ी देर में यहां उच्‍चस्‍तरीय मीटिंग होगी जिसमें वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर फैसला हो सकता है।

अभी तक ऑगर मशीन से सुरंग में होरिजेंटल (क्षैतिज) ड्रिलिंग चल रही थी पर बार बार मशीन सरिये के जाल में फंस जा रही है जिसकी वजह से उसे पीछे करना पड़ता है। वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर अंतिम फैसला सतलज जल विद्युत निगम और ऑयल एंड नैचुरल गैस कोऑपरेशन के अधिकारी ही लेंगे। ड्रिलिंग के लिए इंजीनियरों की टीम पहाड़ी पर पहुंच गइ है। जैसे ही उन्‍हें हरी झंडी मिलेगी, वे वर्टिकल ड्रिलिंग का काम शुरू कर देंगे।

मैनुअल ड्रिलिंग करने की आई थी खबर

इससे पहले खबर आई थी कि रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन में जुटी टीम हाथ से ड्रिलिंग करने के विकल्प पर विचार कर रही है। लगातार आ रही बाधाओं के कारण ऑगर मशीन से ड्रिलिंग और मलबे के बीच इस्पात का पाइप डालने का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। श्रमिकों को इस पाइप से बाहर निकालने की योजना है। ऐसे में हाथ से ड्रिलिंग करने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इसमें समय अधिक लगता है।

12 नवंबर को ढह गया था सुरंग का एक हिस्‍सा

आपको बता दें कि चारधाम यात्रा मार्ग पर बन रही सिल्‍क्‍यारा सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था। उसमें काम कर रहे 41 श्रमिक मलबे के दूसरी ओर फंस गए थे। तब से विभिन्न एजेंसियां उन्हें बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं। इन 41 मजदूरों के बाहर निकलने का इंतजार पूरा देश कर रहा है, लेकिन बचाव अभियान में आ रही एक के बाद दूसरी मुश्किलों से सभी की सांसें अटकी हुई हैं। कभी लोहे का जाल, तो कभी सरिया और गर्डर तो कभी पत्थर निकासी टनल के काम में बाधा बन रहे हैं। बुधवार से लेकर शुक्रवार शाम तक ड्रिलिंग का काम बाधाओं में अटका रहा।

पहाड़ी पर पहुंचाई जा रही ड्रिल मशीन
 

गुरुवार रात ऑगर मशीन के प्लैटफॉर्म ठीक किया गया

सबसे पहले गुरुवार रात कमजोर हुए ऑगर मशीन के प्लैटफॉर्म को ठीक किया गया। शुक्रवार को ड्रिलिंग का काम शुरू हुआ तो ऑगर मशीन के रास्ते में स्टील के पाइप आ गए, जिसके चलते पाइप मुड़ गया। स्टील के पाइप और टनल में डाले जा रहे पाइप के मुड़े हिस्से को बाहर निकाल लिया गया है। ऑगर मशीन को भी नुकसान हुआ था, जिसे ठीक कर लिया गया है। शुक्रवार पूरा दिन टेक्निशन निकासी टनल का रास्ता बनाने में जुटे रहे।

15 मीटर की खोदाई अभी बाकी है

मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट ऐंड हाइवेज में अडिशनल सेक्रेट्री महमूद अहमद ने बताया कि 46.8 मीटर की ड्रिलिंग हो चुकी है। इसके बाद मशीन में धातु के टुकड़े फंसने से ड्रिलिंग रोकी गई। इन टुकड़ों को पाइप के मुहाने से हटाना पड़ा। इसके बाद फिर पाइप के आखिरी सिरे में धातु के टुकड़े फंस गए, जिनसे पाइप को नुकसान हुआ। फिर 1.2 मीटर पाइप काटकर निकालना पड़ा। मजदूर करीब 70 मीटर की दूरी पर हैं यानी 15 मीटर की खुदाई बाकी है। टनल में 6-6 मीटर के दो पाइप डालने के बाद उम्मीद की किरण दिख सकती है। ऐसा नहीं हुआ तो तीसरा पाइप डालने की भी तैयारी है।

पहाड़ी पर पहुंचाई जा रही ड्रिल मशीन

 

पीएम मोदी लगातार ले रहे अपडेट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से बात कर बचाव अभियान में आ रही बाधाओं की जानकारी ले रहे है। प्रधानमंत्री ने टनल से बाहर आने पर श्रमिकों के स्वास्थ्य और जरूरत पड़ने पर हॉस्पिटल या घर भेजने समेत तमाम इंतजाम करने का निर्देश भी दिया है। वह रोजाना सिलक्यारा टनल में फंसे 41 श्रमिकों और उनके परिजनों के बारे में फोन से अपडेट ले रहे हैं।

NDRF ने किया मॉक ड्रिल
 

इससे पहले शुक्रवार को NDRF ने मजदूरों को निकालने के लिए मॉक ड्रिल की। इसमें देखा गया कि निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को बचाने के लिए तैयार किए जा रहे रास्ते में पहिए वाले स्ट्रेचर को कैसे ले जाएगा। अभ्यास के दौरान एनडीआरएफ का एक कर्मी रस्सी से बंधे पहिये वाले स्ट्रेचर को धकेलते हुए निकासी टनल से गुजरा और दूसरे छोर पर पहुंचने के बाद उसे वापस खींच लिया गया। पिछले 12 दिनों से अंदर फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए सुरंग में मलबे के बीच से 800 मिलीमीटर व्यास वाले स्टील पाइप का उपयोग करके यह रास्ता बनाया जा रहा है। एनडीआरएफ का एक कर्मी तैयार किये गए रास्ते में गया। वह पहिये वाले स्ट्रेचर पर नीचे की ओर मुंह करके लेटकर अंदर गया। इस दौरान पाया गया कि पाइप के अंदर पर्याप्त जगह है और कर्मी को सांस लेने में कोई कठिनाई महसूस नहीं हुई।

 

पहाड़ी पर पहुंचाई जा रही ड्रिल मशीन

 

ऐसे बाहर आएंगे मज़दूर

  • मलबा काटकर लोहे के 800 mm चौड़े पाइप जब फंसे मजदूरों तक पहुंच जाएंगे तो NDRF की 15 सदस्यों की टीम हेलमेट, ऑक्सिजन सिलेंडर, गैस कटर के साथ पाइप से अंदर जाएगी।
  • चूंकि टनल के अंदर और बाहर के तापमान में काफी अंतर होगा, इसलिए मजदूरों को तुरंत बाहर नहीं लाया जाएगा। उनकी हालत देखी जाएगी।
  • मजदूर ज्यादा कमजोर रहे तो NDRF की टीम उन्हें पाइप के अंदर पहियों लगी ट्रॉली में लिटाकर बाहर खींच लाएगी।
  • सभी 41 मजदूरों को एंबुलेंस से पास के चिल्यानीसौड़ ले जाया जाएगा, जहां 41 बेड का अस्पताल तैयार है। जरूरत पड़ी तो एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश के एम्स ले जाया जाएगा।
  • इतने दिनों तक सुरंग में फंसे होने के कारण सभी मजदूर साइको सोमेटिक ट्रॉमा से गुजर रहे होंगे। एक-एक कर उनकी काउंसलिंग की जाएगी।

एम्स ऋषिकेश में डॉक्टर अलर्ट पर

सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों को निकाले जाने के बाद जरूरत पड़ी तो हेलीपैड से उन्हें एम्स ऋषिकेश ले जाया जाएगा। इसे देखते हुए वहां डॉक्टर अलर्ट पर हैं। एम्स अस्पताल प्रशासन ने मजदूरों के बेहतर इलाज के लिए एक्सपर्ट डॉक्टरों की चार टीमें बनाई हैं। इनमें ट्रॉमा सर्जन, एनेस्थीसिया, मनोरोग और जनरल मेडिसिन विभाग के डॉक्टर शामिल हैं। जरूरत पड़ी तो उत्तरकाशी भेजे जाने के लिए भी डॉक्टरों और नर्सिंग अफसरों की टीम तैयार रखी गई है। एम्स के पास अपना हेलीपैड है, जहां एक बार में तीन हेलीकॉप्टर्स एकसाथ उतारे जा सकते हैं।

 

 
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