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उत्तराखंड में बहुविवाह, हलाला पर रोक संभव, तय हो सकती है बच्चों की संख्या, मुख्य सचिव बोलीं- UCC प्राथमिकता.

 
  • Kunal Kataria
  • 01 Feb 2024
  • 1011
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देहरादून: समान नागरिक संहिता (Uttarakhand UCC) को लेकर उत्तराखंड में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जल्द ही यूसीसी लागू करने की बात कह रहे हैं। उत्तराखंड की 18वीं और पहली महिला मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने पद ग्रहण करने के बाद यूसीसी को लागू करवाने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी का कहना है कि यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड की सभी बहनों को समानता का अधिकार मिलेगा। महिला मुख्य सचिव बनाए जाने को उन्होंने नारी शक्ति का सम्मान बताया है।

पहली महिला मुख्य सचिव हैं

31 जनवरी को उत्तराखंड की 18वीं मुख्य सचिव के रूप में पद ग्रहण करने वाली पहली महिला मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी का कहना है कि प्रदेश में यूसीसी लागू होने के बाद राज्य की सभी महिलाओं को समान अधिकार मिलेगा। यूसीसी की विशेषज्ञ समिति 2 फरवरी को मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।

पहले विधेयक बनेगा

राधा रतूड़ी ने कहा, रिपोर्ट को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाएगा। इसके बाद उसका एक विधेयक बनेगा। यह विधेयक 5 फरवरी से 8 फरवरी तक आहूत विधानसभा सत्र के दौरान पास करना सबसे अहम चुनौती है। यूसीसी महिलाओं को बराबरी का हक देगा क्योंकि यह समानता और न्याय देने के लिए ही बनाया जा रहा है। यह एक ऐतिहासिक काम है। हमारा सौभाग्य है कि हम इस काम को उत्तराखंड से शुरू कर रहे हैं।

पत्रकारिता से ब्‍यूरोक्रेसी के शिखर पर

आईएएस राधा रतूड़ी लोक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ ही महिला सम्मान और उनके अधिकारों की प्रबल हिमायती हैं। वे हमेशा महिलाओं के अधिकारों को लेकर सजग रही हैं। इसी कड़ी में यूसीसी में महिलाओं को मिलने वाले समानता के अधिकार को लेकर भी वे बेहद उत्साहित हैं। पत्रकारिता से सफर शुरू करने के बाद ब्यूरोक्रेसी के उच्च पद तक पहुंचने को लेकर उनका कहना है कि समाज में बराबरी लाना पत्रकारिता एक माध्यम हो सकता है। वहीं, प्रशासनिक व्यवस्था के सर्वोच्च पद पर आने के बाद मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजना का लाभ पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में है।

2022 से चल रही है यूसीसी की कवायद

उत्तराखंड में 27 मई 2022 से समान नागरिक संहिता को लेकर कवायद चल रही है। धामी 2.0 सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहली कैबिनेट बैठक में ही यूसीसी लागू करने को लेकर मोहर लगा दी थी। इसके बाद मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया था। तब से अब तक कमेटी का कार्यकाल चार बार बढ़ाया जा चुका है। अब कमेटी 2 फरवरी को मुख्यमंत्री को यूसीसी का ड्राफ्ट सौंप देगी।

सीएम धामी कानूनी रूप देने को तैयार

अपने वायदे के अनुरूप मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा सत्र में यूजीसी बिल पेश कर सदन में पारित करवा कर कानूनी रूप देने के लिए तैयार हैं। यूसीसी को लेकर भले ही उत्तराखंड में तमाम कयासबाजियां हो रही हों और राजनीतिक गलियारों में इसे लोकसभा चुनाव से पहले एक स्टंट के रूप में देखा जा रहा हो लेकिन धामी सरकार ने इसे सभी के लिए बेहद जरूरी बताते हुए जल्द लागू करने की बात कही है।

यूसीसी का मसौदा तैयार होने और 2 फरवरी को सरकार को ड्राफ्ट सौंपे जाने को लेकर मुख्यमंत्री धामी कह चुके हैं कि साल 2022 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा का यह संकल्प था कि प्रदेश में भाजपा सरकार यूसीसी लागू करेगी। जनादेश के बाद भाजपा ने सरकार बनाने के बाद यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्य कमेटी का गठन किया।

विशेषज्ञ कमेटी ने अपना काम पूरा कर लिया है और 2 फरवरी को यूसीसी का फाइनल ड्राफ्ट उनके हाथ में होगा। इसके बाद सरकार रिपोर्ट का आकलन करेगी और एक्ट बनाने को लेकर जरूरी कार्रवाई पर अमल किया जाएगा।

यूसीसी लागू होने के बाद होंगे ये बदलाव

- यूसीसी लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लगेगी। बहु विवाह पूरी तरह से बैन हो जाएगा।

 


- लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल हो सकती है।
- लिव इन रिलेशनशिप के लिए डिक्लेरेशन जरूरी होगा। लिव इन रिलेशनशिप में रहने वालों को अपने माता-पिता को जानकारी देनी जरूरी होगी। लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए पुलिस के पास पंजीकरण कराना होगा।
- उत्तराधिकार में लड़कियों को लड़कों के बराबर हिस्सा मिलेगा।
- एडॉप्शन सभी के लिए मान्य होगा। मुस्लिम महिलाओं को भी गोद लेने का अधिकार मिलेगा और गोद लेने की प्रक्रिया भी सरल हो जाएगी।
- मुस्लिम समुदाय में होने वाले हलाला और इद्दत पर रोक लगेगी।
- शादी के बाद रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। हर शादी का गांव में ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। बिना पंजीकरण शादी अमान्य मानी जाएगी।
- शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।
- पति और पत्नी दोनों को तलाक के समान आधार उपलब्ध होंगे।
- नौकरीशुदा बेटे की मौत पर पत्नी को मिलने वाले मुआवजे में वृद्ध माता-पिता के भरण पोषण की जिम्मेदारी होगी।
- यदि पत्नी पुनर्विवाह करती है तो पति की मौत पर मिलने वाले मुआवजे में माता-पिता का हिस्सा होगा।
- पत्नी की मौत हो जाती है और उसके माता-पिता का कोई सहारा ना हो तो उनके भरण पोषण की जिम्मेदारी पति की होगी।
- बच्चों के अनाथ होने की सूरत में गार्जियनशिप की प्रक्रिया को आसान किया जाएगा।
- पति-पत्नी में झगड़े के हालात में बच्चों की कस्टडी उनके ग्रैंड पेरेंट्स को दी जा सकती है।
- जनसंख्या नियंत्रण का प्रावधान हो सकता है। बच्चों की सीमा तय की जा सकती है।


 

 

 
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