घर-परिवार में आज भी बच्चियों को पीरियड के बारे में सही तरह से बताया नहीं जाता है। स्कूलों में भी पीरियड के बारे में समुचित जानकारी नहीं दी जाती है। जिसके कारण पीरियड के बारे में सही जानकारी के अभाव में आज भी ज्यादातर महिलाएं विभिन्न प्रकार की गलतफहमियों में जीती हैं। एक्सपर्ट्स से जानिए, पीरियड्स से जुड़ी भ्रांतियों के बारे में सच्चाई की।
एक्सपर्ट्स कहते हैं, "पीरियड सायकल हर महिला के लिए अलग-अलग हो सकता है। यह प्रत्येक महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इसलिए यह मानना कि पीरियड सायकल 28 दिनों पर ही आना चाहिए, सरासर गलत है। जबकि सच्चाई यह है कि पीरियड सायकल 20 दिनों से लेकर 35 दिनों के भीतर हो सकता है। कई बार बहुत ज्यादा स्ट्रेस में होने पर या लंबे समय तक बीमार रहने पर भी पीरियड देर से आता है।"
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चारु पंत कहती हैं, "पीरियड का खाने से कोई लेना-देना नहीं है। बहुत सारी महिलाएं मानती हैं कि पीरियड के दिनों में खट्टा, तीखा और मसालेदार भोजन करने से दर्द की समस्या ज्यादा बढ़ सकती है। इसलिए वे इनदिनों मन होने पर भी अपना फेवरेट गोलगप्पा नहीं खाती। इस तरह की गलतफहमियां निराधार है। याद रखिए कि खट्टा, तीखा और मसालेदार भोजन करने से आपके पीरियड पर कोई असर नहीं पड़ता है।
आपने भी अपने घर में दादी, नानी, चाची, मौसी या अपनी मां को यह निर्देश देते सुना होगा कि पीरियड के दिनों में अचार की बरनी को मत छूना, नहीं तो अचार खराब हो जाएगा। जबकि सच्चाई यह है कि आपके पीरियड से अचार का कोई तालमेल ही नहीं है, फिर भला आपके छूने से अचार या कोई भी अन्य खाने की चीज कैसे खराब हो सकती है। इसलिए इन निराधार बातों पर ध्यान न दें।
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा सिन्हा कहती हैं, "पीरियड के दौरान हर माह आपके शरीर से एक निश्चित मात्रा में गंदा ब्लड बाहर निकलता है। इससे शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। पीरियड और कमजोरी का कोई संबंध नहीं है। अगर आपको कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसका कोई अन्य कारण भी हो सकता है। इसके लिए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।"
पीरियड के दौरान पेट दर्द, कमर दर्द की समस्या होने पर आराम करना जरूरी है, लेकिन पीरियड के दिनों में सिर्फ आराम ही करना चाहिए, ये सही नहीं है। पीरियड के दौरान स्वास्थ्य सही रहने पर आप नॉर्मल दिनों की ही भांति ही अपने सभी काम कर सकती हैं, चाहे घरेलू काम हो ऑफिस जाना हो, शॉपिंग करने करना हो या किसी पार्टी में जाना ही हो। पहले के ज़माने में जब महिलाएं दिन भर घर के कामों में उलझी रहती थी, वे आज के समय की महिलाओं की तरह घर और ऑफिस के कामों में एक्टिव नहीं थी, तो उन्हें महीने में कम-से-कम 45 दिनों तक आराम करने के लिए पीरियड के दौरान घर के कामों और किचन से दूर रखने के लिए इस तरह के नियम बनाए गए थे।
यह धारणा भी सरासर गलत है कि पीरियड के दौरान सेक्स नहीं करना चाहिए, इससे दर्द ज्यादा होता है। जबकि सेक्सोलोजिस्ट ए. के.धर कहते हैं, "पीरियड के दौरान सेक्स करने से महिलाओं को दर्द और ऐंठन से राहत मिलती है। पीरियड्स के दौरान आप सेक्स कर सकती हैं, लेकिन बिना प्रोटेक्शन के सेक्स करने से बचें। चूंकि इस समय होनेवाली ब्लीडिंग से कई बैक्टीरिया सम्बंधित इन्फेक्शन होने की सम्भावना रहती है। इसके अलावा, पीरियड के समय गर्भाशय पतला रहता है, जिससे आसानी से बैक्टीरिया संचारित हो सकता है।पीरियड्स के दौरान योनि और गर्भाशय की स्थिति नाजुक होती है, इसलिए इस दौरान बहुत ही कोमलता के साथ सावधानी पूर्वक सेक्सुअल रिलेशन बनाने चाहिए।"
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चारु पंत कहती हैं, "ज्यादातर महिलाएं इस बात में विश्वास करती हैं कि पीरियड के दौरान वे प्रेग्नेंट नहीं हो सकती। जबकि ऐसा नहीं है। जिन महिलाओं का पीरियड सायकल 28 दिनों से कम का होता है। उनके प्रेग्नेंट होने का खतरा ज्यादा रहता है।"
करण बतौर कंटेंट राइटर लाइफस्टाइल टीम से लंबे समय से जुड़े हैं। सेक्सुअल हेल्थ से संबंधित विषयों के बारे में यह अच्छी समझ रखते हैं। इसके साथ ही हेल्थ विशेषज्ञों से बातचीत करके पाठकों तक उनके सवालों के जवाब को आसान भाषा में पहुंचाने का उन्हें बेहतरीन अनुभव है।