नई दिल्ली: कोरोना वायरस के कहर को हम जैसे ही भूलने की कोशिश करते है वैसे ही इसका एक नया वैरिएंट आ धमकता है। एक बार फिर से कोरोना वायरस के दो नए वैरिएंट KP1.1 और KP.2 ने दुनिया भर में पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। उन दोनों वैरिएंट को FLiRT का नाम दिया गया है। इन दोनों नए वैरिएंट में से एक वैरिएंट KP.2 ने तो भारत के कुछ शहरों में भी दस्तक दे दी है। महाराष्ट्र में इस नए सब वैरिएंटके 91 मामले दर्ज किए गए हैं। जिनमे से पुणे में KP.2 के सबसे अधिक 51 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद ठाणे में 20 मामले सामने आए हैं।
कोविड-19 ओमिक्रॉन सब वेरिएंट KP.2 का पहला मामला साल 2024 के पहले महीने में ही सामने आया था। उसके बाद से मामलों में इजाफा होता गया और मार्च अप्रैल तक संख्या में काफी इजाफा हो गया। हालांकि अभी इस संक्रमण की वजह से अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या नहीं बढ़ी है। इस नए सब वैरिएंट KP.2 के पुणे और ठाणे के अलावा, अमरावती और औरंगाबाद में सात-सात मामले सामने आए, जबकि सोलापुर में दो मामले और अहमदनगर, नासिक, लातूर और सांगली में KP.2 वैरिएंट का एक-एक मामला सामने आया है।
कोविड-19 ओमिक्रॉन के इस नए सब वेरिएंट को FLiRT का नाम दिया गया है। FLiRT में दो म्यूटेंट शामिल हैं। जो KP.1.1 और KP.2 हैं। आइए जानते हैं कि इन दोनों म्यूटेंट को मिलाकर कैसे इसे FLiRT नाम दिया गया। दरअसल KP.2 से आया ‘FL’ फिर KP.1.1. से आया है, ‘RT’। एक तरफ FL, दूसरी तरफ RT और दोनों को अंग्रेजी के छोटे वाले i से जोड़कर FLiRT बना दिया गया है।
कोरोना वायरस के नए वैरिएंट FLiRT का असर सबसे ज्यादा कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर हो सकता है। ऐसे में इसके शिकार डायबिटीज, कैंसर जैसी बीमारियों से गुजर रहे लोग हो सकते हैं। ऐसे में अगर आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण अपने शरीर में दिखते हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए। इसके साथ ही खांसी होने पर मास्क का इस्तेमाल करें और सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखे।
विशेषज्ञों के अनुसार, जो व्यक्ति पहले COVID-19 के JN.1 वैरिएंट से संक्रमित हो चुके हैं वो KP.2 वैरिएंट की चपेट में भी आ सकते हैं। कोरोना के इस नए वैरिएंट FLiRT पर वैक्सीन के असर पर डॉक्टरों का मानना है कि वैक्सीन कुछ हद तक ही सुरक्षित रख सकता है। सीडीसी के प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान में यह सुझाव देने के लिए कोई सबूत नहीं है कि KP.2 अन्य सब वैरिएंट की तुलना में कि अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है। हालांकि 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग, गर्भवती महिलाएं, और कमजोर इम्यूनिटी के लोगों को COVID-19 से खतरा बना रहता है।