देहरादून: एक चोट ने अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी की राह में बाधा खड़ी की तो इस खिलाड़ी ने हार नहीं मानी। उसने और बड़ी लकीर खींच दी और अपने पिता के नक्शे कदम पर चल पड़ी। उत्तराखंड की एकमात्र शटलर और पूर्व डीजीपी अशोक कुमार की बेटी ने यूपीएससी में 178वीं रैंक पा कर देवभूमि का नाम रोशन किया है। नौ साल की उम्र से बैडमिंटन से खेल की शुरूआत करने वाली कुहू खेल जगत का चमकता सितारा हैं और अब उनका आईपीएस बनना भी तय है।
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी) का फाइनल रिजल्ट आने के बाद से होनहारों के घरों पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इन्हीं में से एक होनहार है कुहू गर्ग जिसने खेल के मैदान से लेकर यूपीएससी की परीक्षा तक अपने परिजनों और प्रदेश का मान बढ़ाया है। अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी और पूर्व डीजीपी अशोक कुमार की बेटी कुहू गर्ग ने खेल के मैदान से यूपीएससी तक का सफर तय कर लिया है।
कुहू गर्ग अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। कुहू गर्ग उत्तराखंड की एकमात्र शटलर हैं और वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं। उन्होंने 19 इंटरनेशनल और 56 ऑल इंडिया एंड नेशनल मेडल्स जीते हैं जो किसी भी माता-पिता के लिए गर्व की बात है। वर्ष 2018 में वर्ल्ड चैंपियनशिप की क्वार्टर फाइनल में भी पहुंची थी।
कोविड-19 महामारी के बाद कुहू को उबर कप ट्रायल के दौरान कुहू के घुटने में चोट आई थी। जिसके लिए उन्हें सर्जरी भी करवानी पड़ी। एक साल तक वह बैडमिंटन कोर्ट पर नहीं उतर सकती थीं। इसी कारण उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी करने का निर्णय लिया और यूपीएससी क्रैक भी कर लिया।
कुहू अपनी सफलता का श्रेय पिता अशोक कुमार को देते हुए कहती हैं कि पापा एक डीजीपी होने के नाते रोज कई लोगों की मदद करते थे। इससे मुझे भी प्रेरणा मिली। सर्विस में रहने के दौरान उन्होंने कई किताबें लिखी, मैंने उन्हें पढ़ा है। इस तरह से मेरा नेतृत्व और मेंटरशिप मेरे पापा ने ही की है। मेरी इस सफलता में उनका बहुत बड़ा योगदान है।