हमारे पूरे बॉडी फंक्शन से लेकर बेन फंक्शन तक में हार्मोन का बहुत अहम रोल है। हार्मोन असंतुलन होने पर न सिर्फ हमारी शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं, बल्कि मानसिक स्थितियों पर भी हार्मोनल असंतुलन का गहरा असर पड़ता है।
हार्मोन्स एंडोक्राइन ग्रंथि से बनने वाले ऐसे रसायन होते हैं, जो खून के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंचते हैं और शरीर को अलग.अलग कार्यों को करने के लिए ऑर्डर देते हैं। इसमें खराबी होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि खराब डाइट और लाइफस्टाइल। आज हम उन स्थितियों की बात करेंगे, जो हार्मोनल असंतुलन के रिस्क को और भी ज्यादा बढ़ा सकती हैं।
हार्मोनल असंतुलन के लक्षण
शरीर का वजन बढ़ना
ठंड या गर्मी का बहुत ज्यादा महसूस करना
थकान महसूस करना
कब्ज की समस्या
ड्राई स्किन
अचानक से वजन घटना
बहुत ज्यादा प्यास लगना
मांसपेशियों में दर्द और अकड़न

धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में हार्मोनल असंतुलन के खतरे बढ़ जाते हैं। धूम्रपान करने से शरीर में कई प्रकार के हार्मोन इंबैलेंस हो सकते हैं, थायराइड का जोखिम भी बढ़ जाता है। जिससे सामान्य स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

बहुत ज्यादा तनाव लेने के कारण से भी हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती हैं। तनाव के दौरान, शरीर विभिन्न प्रकार के हार्मोन्स को उत्पन्न करता है, जिनमें कोर्टिसोल और एड्रेनालिन शामिल हैं। जिसके कारण अवसाद, अधिक तनाव, नींद की समस्या, वजन में परिवर्तन और मासिक धर्म के अनियमितता शामिल हैं।

दैनिक आहार में पोषक तत्वों की कमी, फास्ट फूड या जंक फूड का अधिक सेवन करना हार्मोनल असंतुलन का कारण हो सकती है। फास्ट फूड और जंक फूड में अधिक मात्रा में तेल, शक्कर, नमक और प्रसंस्कृत कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जो हार्मोनल स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।

ओवर एक्सरसाइज करना भी हार्मोनल इंबैलेंस का कारण हो सकता है। जो लोग बहुत अत्यधिक एक्सरसाइज करते हैं, उनमें यह समस्या देखी जाती है। इसलिए एक्सरसाइज भी सही मात्रा में करनी चाहिए।

बहुत अधिक बैठना और शारीरिक गतिविधि की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस और मोटापा बढ़ सकता है, जो हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।