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टिहरी लोकसभा सीट पर राजपरिवार का दबदबा कायम, राज्यलक्ष्मी शाह ने लहराया भगवा परचम.

 
  • Ajay Rajendra Shukla
  • 05 Jun 2024
  • 750
image  

 

 

देहरादून: उत्‍तराखंड की 5 लोकसभा सीटों में से एक टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट 14 विधानसभा क्षेत्रों को मिलकर बनी है। इस सीट पर शुरू से राजघराने का कब्‍जा रहा है। यहां की सांसद माला राज्‍य लक्ष्‍मी शाह एक बार फि‍र भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में थीं। माला राज्‍य लक्ष्‍मी इस बार लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने के प्रयास में थीं। उन्‍होंने 462603 वोट हासिल करके जीत दज। उन्‍हें कांग्रेस के जोत सिंह गुनसोला चुनौती दे रहे थे। कांग्रेस इस सीट पर आखिरी बार वि‍जय बहुगुणा की अगुवाई में 2009 में लोकसभा चुनाव जीती थी। इस बार 19 मई को हुए मतदान में टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट पर 53.76 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

टिहरी गढ़वाल उत्‍तराखंड लोकसभा चुनाव 2024- देखें जिले से कौन जीता कौन हारा

पार्टीकैंडीडेटकौन जीता कौन हारा
बीजेपीमाला राज्‍य लक्ष्‍मी शाहजीते
कांग्रेसजोत सिंह गुनसोला 
बहुजन समाज पार्टीनेमचंद 
राष्‍ट्रीय उत्‍तराखंड पार्टीनवनीत सिंह गोसाईं 
पीपल्‍स पार्टी ऑफ इंडियाराम पाल सिंह 

कांग्रेस के लिए आसान नहीं राजघराने की चुनौती

टिहरी लोकसभा क्षेत्र तीन जनपदों में चार आरक्षित विधानसभा सीटें हैं। अधिकांश पर भाजपा का कब्जा है। टिहरी लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान में शाही परिवार की माला राज्य लक्ष्मी शाह सांसद हैं। इस सीट पर शुरू से ही राजघराने का दबदबा रहा है। टिहरी संसदीय सीट पर कई दिग्गज चुनाव मैदान में उतरे लेकिन शाही घराने के लोग ही सांसद बने। इस सीट पर पहली बार सांसद का चुनाव होने पर राजमाता कमलेंदुमती शाह ने जीत हासिल की थी। लगभग 40 वर्षों तक राज परिवार के किसी न किसी सदस्य ने इस सीट पर प्रतिनिधित्व किया है।
 

1971 में कांग्रेस ने रचा था इतिहास

1957, 1962 और 1967 के आम चुनाव में महाराजा मानवेंद्र शाह ने हैट्रिक बनाई। 1971 में कांग्रेस उम्मीदवार परिपूर्णानंद पैन्यूली ने निर्दलीय महाराजा मानवेंद्र शाह को हराकर टिहरी राजघराने का तिलिस्म तोड़ा था। आपातकाल के बाद कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। तब कांग्रेस ने देहरादून से हीरा सिंह बिष्ट को टिहरी संसदीय सीट पर उतरा था। 1977 में उन्हें तब त्रेपन सिंह नेगी ने हार का स्वाद चखाया।

विजय बहुगुणा ने भी दिखाया दम

हालांकि बाद में त्रेपन सिंह नेगी कांग्रेस में शामिल हो गए और 1980 में दोबारा सांसद चुने गए। 1985 में कांग्रेस ने देहरादून के ही ब्रह्मदत्त को टिकट दिया और टिहरी से बाहरी सांसद के कब्जे में गई। 1989 में भी ब्रह्मदत्त ही चुनाव जीते। 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में भाजपा के टिकट पर मानवेंद्र शाह चुनाव मैदान में उतरे और लगातार सांसद बनते रहे। राजा मानवेंद्र शाह ने राजघराने का राजनीतिक वनवास तोड़ा लेकिन उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में इस सीट का प्रतिनिधित्व बाहरी हाथों में चला गया।
तब कांग्रेस के विजय बहुगुणा ने यहां से जीत हासिल की। 2007 और 2009 में विजय बहुगुणा टिहरी संसदीय सीट से सांसद बने। लेकिन 2012 में एक बार फिर राजघराने की वापसी हुई और भाजपा से माला राज्य लक्ष्मी शाह सांसद बनी। 2014 और 2019 में भी माला राज्य लक्ष्मी शाह को ही टिहरी संसदीय सीट पर जीत मिली।

भारत-चीन सीमा से सटी है लोकसभा सीट

लोकसभा क्षेत्र होने के साथ ही इस सीट का धार्मिक महत्व भी है। इस लोकसभा क्षेत्र में लाखामंडल, गंगा का उद्गम स्थल गोमुख, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम तथा दुनियां का आठवां सबसे बड़ा टिहरी बांध स्थित हैं। लोकसभा सीट की सीमा भारत-चीन सीमा से लगी है। टिहरी राज्य का आजादी के बाद भारत में विलय होने के बाद भी लोस चुनाव में राजशाही का दबदबा रहा। दस आम चुनावों में राजशाही परिवार के सदस्य ही सांसद चुने गए। 1957 में यह संसदीय क्षेत्र पहली बार अस्तित्व में आया। इस लोकसभा सीट को उत्तरकाशी, देहरादून और टिहरी गढ़वाल जिले के कुछ हिस्सों को शामिल कर बनाया गया है। टिहरी और गढ़वाल दो अलग नामों को मिलाकर इस जिले का नाम रखा गया है। इस इलाके को गणेश प्रयाग नाम से भी जाना जाता है।

माला राज्य लक्ष्मी शाह बनी उत्‍तराखंड की पहली महिला सांसद

यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड को पहली महिला सांसद 2012 के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी शाह के रूप में मिली थी। 2014 के आम चुनाव में भी वह जीतीं और 2019 के कड़े मुकाबले में भी माला राज्य लक्ष्मी शाह ने अपनी जीत बरकरार रखी। टिहरी लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। यह भी कहा जा सकता है कि टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट की राजनीति भाजपा और कांग्रेस के इर्दगिर्द ही घूमती रहती है।

कांग्रेस 10 बार और भाजपा 8 बार दर्ज कर चुकी है जीत

चुनाव और उपचुनाव को मिलाकर यहां कुल 18 बार मतदान हुआ। जनता ने 10 बार कांग्रेस को और आठ बार भाजपा को मौका दिया। टिहरी संसदीय सीट में आबादी का लगभग 62 फ़ीसदी हिस्सा गांव में रहता है जबकि 38 फीसदी हिस्सा शहर में निवास करता है। इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति का आंकड़ा 17.15 प्रतिशत है जबकि अनुसूचित जनजाति का हिस्सा 5.8 प्रतिशत है।

धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है टिहरी

टिहरी में श्री बूढ़ा केदारनाथ मंदिर, हासरताल, नागटिब्बा, चंबा, कैंपटी फॉल, देवप्रयाग और धनौल्टी आदि पर्यटन स्थल हैं। भागीरथी नदी के तट पर बसे उत्तरकाशी में भगवान विश्वानाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। सात ताल, केदार ताल, नचिकेता ताल, गोमुख और नंदन-वन-तपोवन यहां के प्रमुख स्थान हैं। देहरादून में भी टपकेश्वर मंदिर, खलंगा स्मारक, चार सिद्ध, गुच्छूपानी, एफआरआई, तपोवन, संतलादेवी मंदिर, सहस्त्रधारा प्रमुख हैं।

 

 
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