नई दिल्ली: जमीनी सीमाओं के बाद समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तान के साथ अपने सैन्य सहयोग को बढ़ा रहा है आक्रामक चीन निकट भविष्य में भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान के सामने सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा बना रहेगा। नई सरकार को इस चुनौती से निपटने के लिए बजट के दायरे में रहकर इंटीग्रेटेड, फ्यूचर रेडी मिलिट्री फोर्स तैयार करना होगा ताकि आने वाले वर्षों में भारत इन खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सके।
चीन की आक्रामक मुद्रा और पाकिस्तान के साथ उसके थल और जल, दोनों जगह सैन्य सहयोग से भारत की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। कई विशेषज्ञों और अधिकारियों ने अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) को बताया कि नई सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कई मोर्चों पर काम करना होगा कि भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और पारंपरिक युद्ध-लड़ने की मशीनरी पूरी तालमेल के साथ भविष्य के लिए तैयार हो और आने वाले वर्षों में सैन्य बजट सीमा से बाहर नहीं जाए।
सिस्टमैटिक रिफॉर्म में थल, जल और वायु, तीनों सेनाओं के लिए अलग-अलग कमान स्थापित करने के साथ-साथ एक सुसंगत राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति बनाना बहुत जरूरी है। वहीं, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में निवेश तथा निजी क्षेत्र के साथ सहयोग से रक्षा-औद्योगिक आधार को मजबूत करना भी मोदी सरकार 3.0 की प्राथमिकता होनी चाहिए।
हमले से बचाव की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। इसके लिए 5,000 किलोमीटर से अधिक रेंज वाली अग्नि-5 सहित लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या बढ़ानी होगी। वहीं, परमाणु ऊर्जा संचालित पनडुब्बियों के अपने बेड़े का विस्तार करके अपनी परमाणु तिकड़ी को मजबूत करना होगा ताकि जमीन, हवा और समुद्र से हमला करने की क्षमता सुनिश्चित हो सके।
भारत को लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ बड़ी परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियों (एसएसबीएन) को जोड़कर अपनी पानी के नीचे की क्षमताओं को मजबूत करना चाहिए। वर्तमान में केवल 6,000 टन वजनी आईएनएस अरिहंत, 750 किलोमीटर रेंज की के-15 मिसाइलों के साथ सर्विस में है। इनके अलावा, दो और एसएसबीएन भी जल्द ही सर्विस में आने की उम्मीद है।
मोदी सरकार को तीन थिएटर कमांड बनाने के निर्णय को जमीन पर उतारना चाहिए। एक थिएटर कमांड चीन और पाकिस्तान के साथ जमीनी सीमाओं के लिए और एक हिंद महासागर क्षेत्र के लिए होना चाहिए। रूस-यूक्रेन जैसे मौजूदा संघर्षों में भी लंबी दूरी के सटीक हमला करने वाले हथियारों की परिचालन उपयोगिता का प्रमाण मिला है, इसलिए प्रस्तावित एकीकृत रॉकेट फोर्स को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
'मेक इन इंडिया' पॉलिसी को एक दशक तक आगे बढ़ाने के बावजूद एनडीए सरकार अभी तक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, उन्नत पनडुब्बियों और जेट इंजन जैसी एडवांस मिलिट्री एसेट्स के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी हासिल नहीं कर पाई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'रणनीतिक साझेदारी (एसपी) की पॉलिसी से मुंह मोड़ने की जरूरत है।' मई 2017 में ही रणनीतिक साझेदारी की नीति बनी, लेकिन आज तक किसी प्रमुख विदेशी हथियार कंपनी के साथ गठजोड़ से स्वदेशी उत्पादन का एक भी प्रॉजेक्ट शुरू नहीं हो पाया।
इन सैन्य सुधारों से ही प्रोफेसर के विजय राघवन के नेतृत्व वाली विशेषज्ञ समिति की प्रस्तावित डीआरडीओ का संरचनात्मक सुधार भी जुड़ा हुआ है। मोदी सरकार को डीआरडीओ में भी आमूल-चूल बदलाव लाने होंगे।