देहरादून: 'बद्रीनाथ मंदिर के देवता बद्री विशाल भक्तों की तरफ से दिए जाने वाले सभी प्रसाद, उपहार और दान पर विशेष रूप से अधिकार रखते हैं।' चमोली की एक अदालत ने नेपाली आश्रम में मिले दान पर पुजारियों के संगठन नेपाली लाल मोहरिया पंडा समाज (एनएलएमपीएस) के दावों से जुड़े विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। इस फैसले में कहा गया है, 'केवल बद्री विशाल के पास ऐसी सभी वस्तुओं पर पूर्ण अधिकार है। चूंकि मंदिर में मूर्ति एक कानूनी इकाई है, इसलिए मंदिर के पास प्रसाद पर विशेष अधिकार है और कोई अन्य व्यक्ति इस पर अधिकार नहीं जता सकता।'
आपको बता दें कि यह मुकदमा तब शुरू हुआ जब एनएलएमपीएस के दो भाइयों, हरि प्रसाद डिमरी और बल्लभ प्रसाद ने 2017 में नेपाली आश्रम द्वारा प्राप्त दान पर अपना अधिकार जताते हुए इसे एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा बताया। 2018 में भाइयों ने एनएलएमपीएस और नेपाली आश्रम के खिलाफ मुकदमा दायर किया, जिसमें तर्क दिया गया कि लाखों रुपये के दान में से उनका हिस्सा रोक दिया गया था।
गौरतलब है कि इस साल 12 मई को विश्वप्रसिद्ध श्रीबदरीनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए थे। इस मौके पर मंदिर को करीब 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया था। कपाट खुलने के साथ ही यहां पर स्थानीय लोगों ने धरना प्रदर्शन भी किया। इन लोगों ने अफसरों के सामने जमकर नारेबाजी भी की। स्थानीय लोगों का कहना है कि वीआईपी कल्चर की वजह से दूर दूर से आ रहे तीर्थयात्रियों को दर्शन करने में परेशानी हो रही है। बड़े बड़े वीआईपी मंदिर के पिछले द्वारों से प्रवेश कर रहे हैं। इस वजह से आम लोगों को दर्शन आसानी से नहीं मिल पा रहा है।