देहरादून: देवभूमि के रहने वाले 25 साल के कैप्टन दीपक सिंह दो दिन पहले बुधवार को जम्मू-कश्मीर के डोडा में शहीद हो गए थे। राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात रहे दीपक सिंह की आतंकियों से मुठभेड़ हो गई थी। 15 अगस्त को देहरादून में उनका पार्थिव शरीर पहुंचा और पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। ताबूत देखकर दीपक सिंह के पिता भावुक हो गए। मां का तो रोते-रोते बुरा हाल हो गया। दोनों बहनें भी बिलख पड़ीं। रक्षाबंधन से पहले भाई को खोने का दुख उनके चेहरे पर साफ देखा जा सकता था। शहीद के घर पर उनके अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों की भीड़ उमड़ी। भाई को अंतिम विदाई देते वक्त दोनों बहनों ने कहा- 'भाई वी आर प्राउड सिस्टर्स। वी आर रियली रियली प्राउड ऑफ यू'
कैप्टन दीपक सिंह का पार्थिव शरीर जैसे ही कुंआवाला स्थित उनके घर लाया गया, अंतिम दर्शन करने वालों का तांता लग गया। इस दौरान लोगों ने भारतीय सेना जिंदाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। वीर शहीद अमर रहे, भारत माता की जय और जब तक सूरज चांद रहेगा दीपक तेरा नाम रहेगा की जयघोष के बीच अंतिम दर्शन के लिए लंबी लाइन लगी रही। दीपक सिंह के पिता महेश सिंह इसी 30 अप्रैल को उत्तराखंड पुलिस से रिटायर हुए हैं। जैसे ही वह पुष्पचक्र लेकर बेटे को श्रद्धाजंलि देने के लिए आगे बढ़े, खुद को रोने से रोक नहीं पाए। अंतिम सलामी देने के बाद वह जमीन पर बैठकर रोने लगे। उनकी हालत देखकर वहां मौजूद हर किसी के आंसू छलक आए। किसी तरह परिजनों ने महेश सिंह को सहारा दिया और अपने साथ ले गए।
Captain Deepak Singh अमर रहें???? pic.twitter.com/rkeitCcf2g
— Frontalforce ???????? (@FrontalForce) August 16, 2024
पिता महेश सिंह के बाद दीपक सिंह की दोनों बहनें उनको अंतिम विदाई देने आई। इनमें से एक बहन की पिछले साल शादी हुई है। दोनों बहनों ने पुष्पचक्र चढ़ाने के बाद नीचे जमीन पर बैठ गईं और ताबूत पर सिर रखकर जोर-जोर से रोने लगीं। इस दौरान एक बहन यह कहते हुई नजर आईं कि मैंने तुम्हें राष्ट्रीय राइफल्स में जाने के लिए रोका था पर तुम क्यों चले गए भाई। वहीं, दूसरी बहन ने भाई की शहादत पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि हम प्राउड बहनें हैं। हमें अपने भाई पर वास्तव में बहुत अभिमान है।
आपको बता दें कि कैप्टन दीपक सिंह मूलरूप से रानीखेत के रहने वाले थे। उनका परिवार देहरादून में रहता है। उनकी शहादत के वक्त माता और पिता केरल में रहने वाली बेटी के घर गए थे। 14 अगस्त को दीपक सिंह शहीद हुए और 15 अगस्त को उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनके पिता महेश सिंह ने कहा है कि जब जब 15 अगस्त आएगा, वह अपने बेटे के बलिदान को याद करेंगे।