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क्या पत्नी और माता-पिता के बीच बंटेगा पैसा? शहीद अंशुमान के परिवार में विवाद के बाद उत्तराखंड सरकार जल्द लेगी फैसला.

 
  • Abhishek Shukla
  • 24 Jul 2024
  • 1074
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देहरादून: एक सैनिक शहीद होता है तो पूरा देश उसको नमन करता है। शहीद के माता-पिता और पत्नी को जवान की शहादत के लिए सम्मान दिया जाता है, लेकिन वीरता पुरस्कार और मुआवजा राशि को लेकर होने वाला झगड़ा परिवारों को समाज के सामने अपमान भरी स्थिति में लाकर खड़ा कर देता है।

शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह की पत्नी और माता-पिता के बीच हाल ही में हुए विवाद के बाद यह बात और भी जोर-शोर से उठने लगी है। एक बेटे का पालन-पोषण कर माता-पिता मां भारती की सेवा के लिए फौज में भेजते हैं, उसी बेटे की शहादत पर पूरा हक उनकी पत्नी को क्यों दे दिया जाता है? शहीद के वीरता पुरस्कार या सरकार की ओर से मिलने वाली मुआवजा राशि पर माता-पिता का कोई हक नहीं होता। क्या सिर्फ पत्नी ही वीरता पुरस्कार और मुआवजे की हकदार होती है?

इस तरह का विवाद शहीद परिवार के बीच ना उठे इसको देखते हुए उत्तराखंड सरकार शहीद सैनिक परिवारों को प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली मुआवजा राशि पत्नी और माता-पिता के बीच बांटने की योजना बना रही है। यदि यह फैसला अमल में लाया जाता है तो इस तरह का फैसला लेने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा।

 

अंशुमान सिंह के माता-पिता का वीडियो वायरल हुआ

विगत वर्ष जुलाई माह में सियाचिन में एक घटना के दौरान कैप्टन अंशुमान सिंह शहीद हो गए थे। शहादत पर कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से नवाजा गया। राष्ट्रपति के हाथों शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी और उनकी माता ने कीर्ति चक्र प्राप्त किया था। कुछ समय बाद ही अंकित शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के माता-पिता का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें माता-पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बहू ने सरकार द्वारा प्रदान की गई पूरी मुआवजा राशि ले ली है और बेटे का मेडल भी अपने साथ लेकर घर छोड़कर चली गई है।

परिवार का झगड़ा सड़क पर आ गया

इस पारिवारिक विवाद से जहां कैप्टन अंशुमान सिंह की शहादत को ठेस पहुंची है वहीं परिवार का झगड़ा सड़क पर आ गया। उत्तराखंड में ऐसा कोई मामला ना हो या बेटे की शहादत पर बहू के जाने और सम्मान व मुआवजा राशि भी ले जाने के मामले में कोई विवाद ना हो इसको देखते हुए उत्तराखंड सरकार अहम फैसला ले सकती है।

मुआवजा राशि को बांटने पर विचार कर रही सरकार

उत्तराखंड के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी का कहना है कि इस मुद्दे पर कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों के साथ बैठक की है और मामले पर विस्तार से चर्चा भी की गई है। वर्तमान में राज्य सरकार सशस्त्र बलों के मानदंडों के मुताबिक निकटतम रिश्तेदार पॉलिसी को 25 लाख रुपए देती है। हालांकि सरकार उस योजना पर विचार कर रही है जिससे इस मुआवजा राशि को बांट दिया जाए।

कैबिनेट मंत्री का कहना है कि एक और मीटिंग आयोजित कर प्लानिंग करेंगे और जल्दी इस मामले पर आखिरी फैसला ले लिया जाएगा। विभागीय अधिकारी के अनुसार इतिहास में पहले भी ऐसे कई मामले आए हैं जहां पर मुआवजा राशि मिलने के बाद सैनिक की विधवा ने माता-पिता को उनके हाल पर छोड़ दिया। सरकार के इस फैसले से ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी।

 

 
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