देहरादून: उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और बादल फटने से गौरीकुंड केदारनाथ पैदल मार्ग को नुकसान हुआ है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से पैदल मार्ग पर राम बाद में दो पल और भीम बाली में 25 मीटर रास्ता बह गया है, जिससे केदारनाथ की यात्रा रुक गई है। यहां फंसे हुए 4000 यात्रियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। 3300 यात्रियों को पैदल मार्ग से जबकि 700 यात्रियों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। अभी सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक 5 लोग लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग विशाखा भदाडे ने बताया की लापता लोगों की खोजबीन की जा रही है। साथ ही अलग-अलग जगह पर कुल 16 लोग मरे हैं।
उधर भारी बारिश और आपदा से उत्पन्न स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर रखे हुए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पूरी वस्तुस्थिति की जानकारी ली है।रेस्क्यू के लिए एयर फोर्स का चिनूक, एमआई 17 रवाना, तीन टैंकर ATF की मदद भी भेजी गई है। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर पीएमओ ने हर आवश्यक सहायता के प्रति आश्वस्त किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने भी स्थिति की जानकारी ली है।
इस प्राकृतिक आपदा में बुधवार देर रात तक प्रदेश की विभिन्न जगहों पर नौ लोगों की मौत हो गई थी। गुरुवार को प्रदेश में 7 और लोगों की मौत मौसम के कारण हुई है। टिहरी के विलंगना ब्लॉक में ग्राम पंचायत जखन्याली के नौताड़ में बुधवार की रात बादल फटने से घायल हुए विपिन की भी मौत हो गई जबकि उनके माता-पिता भानु प्रसाद व नीलम की बीती रात ही मौत हो गई थी। रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय में एक व्यक्ति को मृत हालत में लाया गया था, जिसकी पहचान नहीं हो पाई है। अब एसडीआरएफ ने भी एक अज्ञात शव को कालीमठ मोटर मार्ग पर विद्यापीठ के नजदीक नदी से बरामद किया है।
एक तरफ कुदरत केदारपुर में कहर बरपा रही है तो दूसरी तरफ दिल्ली से देहरादून के सहस्त्र धारा घूमने आए दो युवकों की मौत हो गई। उधर देहरादून में डील फैक्ट्री के पास बारे दूसरे युवक का शव भी बरामद हो गया है। वहीं विकास नगर में सहारनपुर थाना क्षेत्र के कैंची वाला में एक युवक की नाले में डूबने के कारण मौत हो गई है।
मंदाकिनी नदी के उफान पर आ जाने के कारण गौरीकुंड बाजार के निचले हिस्से में स्थित गर्म कुंड भी बह गया है। यहां निर्माणाधीन स्नान घर व अन्य जगहों पर भारी मालवा भर गया है उधर सोनप्रयाग के निचले हिस्से में भी मंदाकिनी नदी के बहाव की चपेट में आ जाने के कारण काफी नुकसान हुआ है। प्रशासन व पुलिस ने गौरीकुंड और सोनप्रयाग में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा है।
केदार घाटी में इस आपदा के बाद लगभग 4000 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है जबकि 1000 के लगभग तीर्थ यात्री अब भी यहां फंसे हुए हैं। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के लोग लगातार लोगों की खोजबीन लगे हुए हैं। पिछले 24 घंटे में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ पुलिस की टीम ने मिलकर लगभग 4000 यात्रियों को सकुशल रेस्क्यू किया है।