logo

most visited

  • Covid-19 vaccine: MoU on Sinopharm co-production to be signed on August 16, 2021

    • Xgenious
    • June 19, 2022
  • Anyone can get dressed up and glamorous, but it is how people dress in their days off.

    • Xgenious
    • June 19, 2022
  • I always felt that my greatest asset was not my physical ability, it was my mental ability.

    • Xgenious
    • June 19, 2022

tags

  • News
  • Fashion
  • Politics
  • Sport
  • Food
  • Videos
  • Business

Follow Us

  • Dehradun Wednesday, 4 November 2026
  • Contact Us
logo
Uttarakhand DIPR Uttarakhand DIPR
  • Home
  • Uttarakhand
    • Uttarakhand
    • Nainital
    • Dehradun
  • National
  • International
  • Economics
  • Sports
  • Entertainment
  • Education
  • Editorial
  • More
    • Technology
    • Spirituality
    • Thoughts
    • Lifestyle

BREAKING NEWS

  • 'उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनने पर घर-कुड़ी पेंशन योजना शुरू करेंगे', हरीश रावत ने किया ऐलान.
  • उत्तराखंड में सुशासन को मिलेगी मजबूती: CM धामी ने किया ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ, ‘विजन-2047’ का विमोचन.
  • उत्तरकाशी के केदारताल में फंसे 8 लोगों की तलाश जारी, हेलीकॉप्टर से दो बार हवाई सर्वे, अब तक नहीं मिला सुराग.
  • नवीकरणीय ऊर्जा में उत्तराखंड का कमाल, RE-SAF रैंकिंग में देश में दूसरा स्थान, उपराष्ट्रपति करेंगे सम्मानित.
  • जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसे में मृतक पायलट समेत सभी छह शव मिले, सरकार ने दिए जांच के आदेश.
 
  • Home
  • जेलों में जाति के आधार पर होता है काम, सुप्रीम कोर्ट ने क्या- क्या कहा पूरी बात जानिए

जेलों में जाति के आधार पर होता है काम, सुप्रीम कोर्ट ने क्या- क्या कहा पूरी बात जानिए.

 
  • Anubhav Shakya
  • 03 Oct 2024
  • 1040
image  

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि देश की किसी भी जेल में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जेल नियमावली में मौजूद ऐसे सभी प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए जो इस तरह के भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। यह याचिका महाराष्ट्र के कल्याण की रहने वाली सुकन्या शांता ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ राज्यों की जेल नियमावली जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती है। जेल में भेदभाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या दलीलें दी गईं? आइए बताते हैं।

10 राज्यों की नियमावली को असंवैधानिक बताया

सुप्रीम कोर्ट ने जेल में भेदभाव करने वाले 10 राज्यों के जेल नियमावली को ‘असंवैधानिक’ करार दिया। इन भेदभावों में शारीरिक श्रम का विभाजन, बैरकों को अलग-अलग करना और जाति के आधार पर कैदियों से पक्षपात शामिल हैं। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार कैदियों को भी प्राप्त है।

'अंग्रेजों के कानून कर रहे इस दौर को प्रभावित'

अदालत ने कहा, 'औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानून औपनिवेशिक काल के बाद के दौर को भी प्रभावित कर रहे हैं।’ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से तीन महीने के भीतर अपने जेल नियमावली और कानूनों में संशोधन करने और उसके समक्ष अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। पीठ ने उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के जेल नियमावली के कुछ भेदभावपूर्ण प्रावधानों पर गौर किया और उन्हें खारिज कर दिया।

'सभी लोग एक समान जन्म लेते हैं'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 17 में कहा गया है कि सभी लोग एकसमान जन्म लेते हैं। किसी भी व्यक्ति के अस्तित्व, स्पर्श या उपस्थिति से कोई कलंक नहीं जोड़ा जा सकता। अनुच्छेद 17 के माध्यम से, हमारा संविधान प्रत्येक नागरिक की स्थिति की समानता को मजबूत करता है...। अदालत ने एक उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि कास्ट सिस्टम में निचले समुदायों के दोषियों से जेल में अपने पारंपरिक व्यवसाय जारी रखने की अपेक्षा की जाती है और जेल के बाहर के जातीय सिस्टम को जेल के भीतर भी दोहराया जाता है।

'कैदियों के साथ भेदभाव करना कानून के खिलाफ'

कोर्ट ने आगे कहा, ‘ऐसे नियम जो विशेष रूप से या परोक्ष रूप से जाति पहचान के आधार पर कैदियों के बीच भेदभाव करते हैं, वे अवैध वर्गीकरण और मौलिक समानता के उल्लंघन के कारण अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हैं।’ उदाहरण के लिए, झाड़ू लगाने का काम सौंपने संबंधी नियम, जिसमें यह प्रावधान है कि ‘सफाई कर्मियों का चयन मेहतर या हरि जाति से किया जाएगा’, भी भेदभाव का हिस्सा है।

पत्रकार सुकन्या शांता की याचिका पर सुनाया फैसला

पत्रकार सुकन्या शांता की एक जनहित याचिका पर 148 पेजों का फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस ने जेलों के अंदर विचाराधीन या दोषी कैदियों के रजिस्टरों से 'जाति' कॉलम और जाति के किसी भी संदर्भ को हटाने का आदेश भी दिया। सुकन्या शांता ने जेलों में प्रचलित जाति-आधारित भेदभाव पर एक लेख भी लिखा था।

'कैदियों को सम्मान से जीने का अधिकार'

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा, ‘सम्मान के साथ जीने का अधिकार कैदियों को भी है। कैदियों को सम्मान प्रदान न करना औपनिवेशिक काल की निशानी है, जब उन्हें मानवीय गुणों से वंचित किया जाता था।’ फैसले में कहा गया है, ‘संविधान-पूर्व युग के सत्तावादी शासन ने जेलों को न केवल कारावास के स्थान के रूप में देखा, बल्कि वर्चस्व के उपकरण के रूप में भी देखा। इस अदालत ने संविधान द्वारा लाए गए बदले हुए कानूनी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए माना है कि कैदियों को भी सम्मान का अधिकार है।’

'मानव गरिमा एक संवैधानिक मूल्य'

फैसले में कहा गया है कि मानव गरिमा एक संवैधानिक मूल्य और संवैधानिक लक्ष्य है। अदालत ने अन्य फैसलों का हवाला देते हुए कहा, "मानव गरिमा मानव अस्तित्व का अभिन्न अंग है और दोनों को अलग नहीं किया जा सकता है’ और इसमें ‘यातना या क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार' भी शामिल है।"

सीजेआई ने कहा कि गरिमा और जीवन की गुणवत्ता के बीच भी घनिष्ठ संबंध है। उन्होंने कहा कि मानव अस्तित्व की गरिमा तभी पूरी तरह से साकार होती है जब कोई व्यक्ति गुणवत्तापूर्ण जीवन जीता है।

मौलिक अधिकारों का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘इन प्रावधानों को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव का निषेध), 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और 23 (जबरन श्रम के खिलाफ अधिकार) का उल्लंघन करने के कारण असंवैधानिक घोषित किया जाता है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वे तीन महीने की अवधि के भीतर इस फैसले के अनुसार अपने जेल नियामवली/नियमों को संशोधित करें।’

केंद्र को तीन महीने का दिया समय

इसने केंद्र को आदेश दिया कि वह तीन महीने के भीतर मॉडल जेल नियमावली, 2016 और मॉडल जेल और सुधार सेवा अधिनियम, 2023 में जाति आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए फैसले के अनुसार आवश्यक बदलाव करे।

बेंच ने कहा, ‘‘जेल नियमावली/मॉडल जेल नियमावली में 'आदतन अपराधियों' का उल्लेख संबंधित राज्य विधानसभाओं द्वारा अधिनियमित आदतन अपराधी कानून में दी गई परिभाषा के अनुसार होगा, जो भविष्य में ऐसे कानून के खिलाफ किसी भी संवैधानिक चुनौती के अधीन होगा। विचारणीय जेल नियमावली/नियमों में 'आदतन अपराधियों' के अन्य सभी उल्लेख या परिभाषाएं असंवैधानिक घोषित की जाती हैं।’’
 

जेल नियमावली में बदलाव के निर्देश

फैसले में कहा गया है कि अगर किसी राज्य में आदतन अपराधी कानून नहीं है, तो केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाता है कि वे फैसले के अनुसार जेल नियमावली में आवश्यक बदलाव करें। इसके साथ ही पुलिस को गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश दिया जाता है... ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विमुक्त जनजातियों के सदस्यों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार न किया जाए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट जेलों के अंदर जाति-आधारित भेदभाव के मामलों का भी स्वतः संज्ञान लिया और मामले को तीन महीने बाद 'जेलों के अंदर भेदभाव के संबंध में' शीर्षक के साथ सूचीबद्ध किया। उसने राज्यों से फैसले की अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह फैसले की प्रति तीन सप्ताह की अवधि के भीतर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को प्रसारित करे।

(एजेंसी के इनपुट के साथ)

 

 
Share
Previous Post
कैलाश दर्शन के लिए गुंजी पहुंचा तीर्थयात्रियों का पहला जत्था, उत्तराखंड में दी गईं सुविधाएं, जानें रूट
Next Post
उत्तराखंड में शनिवार से लौटेंगे बादल, हल्की बारिश की संभावना, बढ़ती गर्मी से मिलेगी राहत
First Image Second Image

Latest Video

More Videos

Uttarakhand DIPR
Uttarakhand DIPR

Follow Us

Subscribe Us

Subscribe Us For Latest Updates.

logo

Uttarakhandbyte is a fast-growing news platform delivering the latest news and analysis from India.

  • Editor: Kunal Kataria
  • 100 Sarthi Vihar, Ajabpur Danda, Post Office - NehruGram, Dehradun, Uttarakhand
  • 9557993990
  • uttarakhandbyte@gmail.com

Popular News

  • image

    मसूरी में देर रात दो पक्षों में जमकर चले जूते-चप्पल, पुलिस ने 2 युवतियों को हिरासत में लिया.

    • 10 Oct 2026
  • image

    उत्तराखंड: बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग से बढ़ रही पहचान, मसूरी से नैनीताल तक फिल्म निर्माताओं की पसंद बना देवभूमि.

    • 18 Oct 2026
  • image

    कम उम्र में बाल सफेद होने के कारण: वजहें और क्या किया जा सकता है.

    • 23 Oct 2026

Recent News

  • image

    'उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनने पर घर-कुड़ी पेंशन योजना शुरू करेंगे', हरीश रावत ने किया ऐलान.

    • 03 Nov 2026
  • image

    उत्तराखंड में सुशासन को मिलेगी मजबूती: CM धामी ने किया ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ, ‘विजन-2047’ का विमोचन.

    • 02 Nov 2026
  • image

    उत्तरकाशी के केदारताल में फंसे 8 लोगों की तलाश जारी, हेलीकॉप्टर से दो बार हवाई सर्वे, अब तक नहीं मिला सुराग.

    • 02 Nov 2026

Copyright © Uttarakhandbyte 2022-26 All Rights Reserved.

Website By : World IT Dimensional Solutions.