देहरादून:राजाजी टाइगर रिजर्व के तीन प्रमुख हाथी कॉरिडोर—कंसारु बारकोट, मोतीचूर बारकोट और मोतीचूर गौंहरी—पर हाथी संकेतक बोर्ड लगाए गए हैं। यह पहल नेचर'स बडी, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) और उत्तराखंड वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से पूरी की गई है। इन संकेतक बोर्डों का उद्देश्य हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और उनके आवास को मानवीय हस्तक्षेप से बचाना है।
पहल की मुख्य विशेषताएं
संकेतक बोर्डों की स्थापना के दौरान इन कॉरिडोर की स्थिति और वन्यजीवों की गतिविधियों का गहन अध्ययन किया गया। ये कॉरिडोर हाथियों के पारंपरिक मार्ग हैं जो उन्हें एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही का मार्ग प्रदान करते हैं। लेकिन बढ़ते शहरीकरण और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण इन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही बाधित हो रही है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
नेचर'स बडी और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के साथ उत्तराखंड वन विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि ये संकेतक बोर्ड स्थानीय भाषा और चित्रों का उपयोग करके बनाए जाएं, ताकि क्षेत्र में रहने वाले लोग आसानी से इन संदेशों को समझ सकें। संकेतक बोर्डों पर हाथियों की मौजूदगी और उनके कॉरिडोर के बारे में चेतावनी दी गई है, जिससे राहगीरों और ड्राइवरों को सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
हाथी कॉरिडोर में संकेतक बोर्डों का महत्व

संकेतक बोर्ड न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रभावी साधन भी हैं। हाथी कॉरिडोर में लगे ये संकेतक बोर्ड निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण हैं:
हाथियों की सुरक्षा
इन बोर्डों से यह जानकारी मिलती है कि यह क्षेत्र हाथियों के पारंपरिक मार्गों का हिस्सा है, जिससे वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को सावधानी से आगे बढ़ने की चेतावनी मिलती है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम

इन संकेतकों से इंसानों और हाथियों के बीच टकराव की घटनाओं में कमी आने की संभावना है, क्योंकि लोग सतर्क रहकर हाथियों के गुजरने के समय को समझ सकते हैं और उस हिसाब से अपना रास्ता तय कर सकते हैं।
पर्यावरणीय जागरूकता
इन संकेतक बोर्डों के माध्यम से स्थानीय लोगों और यात्रियों को पर्यावरण और वन्यजीवों के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ती है।
पर्यटन को बढ़ावा
संकेतक बोर्डों से पर्यटकों को भी यह जानकारी मिलती है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे वन्यजीव प्रेमी और शोधकर्ता इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित होते हैं। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचाता है।
भविष्य की दिशा
इस पहल के बाद, नेचर'स बडी, WTI और उत्तराखंड वन विभाग ने यह भी योजना बनाई है कि अन्य वन्यजीव कॉरिडोर में भी इसी तरह के संकेतक बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, स्थानीय समुदायों को वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाएंगे, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष में और कमी लाई जा सके।
संकेतक बोर्डों की यह पहल न केवल वन्यजीव संरक्षण में मददगार साबित हो रही है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बना रही है। इससे भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद की जा रही है।