देहरादून: उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने के 30 दिन के अंदर लिव-इन रिलेशनशिप की रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगी। UCC पर बनी नौ मेंबर कमेटी ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। UCC के बाद शादी का रजिस्ट्रेशन, लिव-इन रिलेशनशिप, तलाक से संबंधित गलत या झूठी सूचना देने पर कार्रवाई का प्रावधान सख्त किया गया है। सूचनाएं झूठी पाई जाने पर तीन से छह महीने की जेल, 25 हजार रुपये जुर्माना या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। हालांकि, अभी ये रिपोर्ट न्याय विभाग से होकर कैबिनेट के सामने भी जानी है।
ब्रेकअप या तलाक की अवधि में दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौन हिंसा के साथ ही एक से अधिक विवाह को सजा की कैटेगरी में रखा गया है। आर्थिक सजा की राशि 50 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक और छह महीने से साढ़े तीन साल तक जेल की सजा देने के प्रावधान रखे गए हैं। 21 साल से ऊपर के लोगों की जानकारी को गुप्त रखा जाएगा, लेकिन इससे कम उम्र के लोगों के पैरेंट्स से जानकारी शेयर की जाएगी।
सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में एक्सपर्ट कमेटी ने शादी के रजिस्ट्रेशन से संबंधित सूचना नहीं देने या ढीला रवैया अपनाने पर सब रजिस्ट्रार पर कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। ऐसे में सब रजिस्ट्रार पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। गलत या झूठी सूचना देने पर तीन महीने की कैद, 25 हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजा साथ देने की व्यवस्था है। रजिस्ट्रेशन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने पर सब रजिस्ट्रार पर 25 हजार रुपये जुर्माना लग सकता है।
लिव-इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेशन कराने से कन्नी काटने पर तीन महीने की कैद या 10 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। लिव-इन रिलेशनशिप के बारे में गलत या झूठी सूचना देने पर जुर्माने की राशि 25 हजार रुपये होगी। नोटिस मिलने के बाद कन्नी काटने पर लिव-इन रिलेशन अपराध घोषित हुआ तो छह महीने की कैद या 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
समान नागरिक संहिता में शादी और तलाक के नियमों का उल्लंघन होने पर कैद और जुर्माना या दोनों प्रावधान हैं। एक से अधिक विवाह को अपराध माना गया है। तलाक और बहु विवाह के प्रकरणों में तीन साल की कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है।