हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पैसे के अभाव में एक बहन को अपने भाई के पार्थिव शरीर को गांव तक ले जाने में कड़ी मशक्कत झेलनी पड़ी। हल्द्वानी के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर का नजारा जिस किसी ने देखा, वह हैरान रह गया। पिथौरागढ़ के बेरीनाग निवासी बहन की पीड़ा को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई। भाई की संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई।
इकलौते भाई की मौत से बहन निढाल थी। ऊपर से एंबुलेंस मिल नहीं पाई। इसके बाद उसने एक टैक्सी वाले को मनाया। टैक्सी की छत पर भाई की लाश रखी। टैक्सी चालक उसके ही गांव का था। उसने रोती-बिलखती उस बहन की मदद की। आखिरकार, उसके भाई का शव अपने गांव की तरफ रवाना हुआ।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, तमोली के ग्वीर की रहने वाली शिवानी हल्दूचौड़ में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती है। शिवानी ने बताया कि सुबह वह अपने भाई के साथ ड्यूटी के लिए निकली थी। एक घंटा काम करने के बाद अभिषेक ने सिर में दर्द होने की बात ही। उसने छुट्टी ली और कमरे में आ गया। शिवानी जब लंच के लिए कमरे में आई तो वहां दवाओं की महक उसे लगी।
शिवानी ने पाया कि कमरे में उसका भाई नहीं था। करीब 2:30 बजे पुलिस का शिवानी को कॉल आया। पुलिस ने जानकारी दी कि उसका भाई बेहोशी की हालत में रेलवे लाइन के किनारे पड़ा मिला है। मेडिकल चौकी प्रभारी प्रवीण तेवतिया ने बताया कि एसटीएच में युवक को मृत घोषित कर दिया गया।
शिवानी प्राइवेट कंपनी में जॉब कर अपने परिवार का खर्च उठाती है। शनिवार को भाई की मौत के बाद उसके शव को गांव ले जाने के समय किसी ने उसकी मदद नहीं की। शिवानी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह एंबुलेंस से शव को अपने गांव ले जा सके। सरकार की योजना पर भी इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिवानी ने एंबुलेंसवालों से पूछा तो उसे किसी ने 10 हजार तो किसी ने 12 हजार रुपये लगने की बात कही। इसके बाद शिवानी ने गांव के ही एक टैक्सी मालिक से संपर्क किया। आखिरकार करीब एक बजे गांव के ही वाहन की छत पर सामान के साथ भाई के शव को बांधकर शिवानी घर के लिए रवाना हुई।