देहरादून: उत्तराखंड के चंपावत में तांबे और यूरेनियम का भंडार होने की संभावना का मामला सामने आया है। इसको लेकर जियोलॉजिकल सर्वे कराया गया था। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट इस दिशा में संकेत दे रही है। इसके बाद अब आगे की तैयारी की जा रही है। अगर यहां पर तांबे और यूरेनियम की खदान मिलती है तो फिर क्षेत्र का भाग्य बदल जाएगा। दरअसल, चंपावत के लधियाघाटी क्षेत्र में खनिजों का भंडार छिपे होने की बात कही जा रही है। प्रारंभिक जियोलॉजिकल सर्वे में इसके संकेत मिलने के बाद हलचल तेज हो गई है।
कलियाधुरा गांव के रहने वाले भपदेव बिनवाल लगातार चार दशकों से क्षेत्र का जियोलॉजिकल सर्वे कराने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर वे पीएमओ को पत्र लिख रहे थे। पीएमओ की ओर इस वर्ष फरवरी माह में उनके पत्र पर संज्ञान लिया गया। इसके बाद पीएमओ ने जिला प्रशासन को भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट में यहां पर तांबा, यूरेनियम और अन्य खनिजों का भंडार की प्रबल संभावना जताई गई है।
खान विभाग की ओर से करीब छह माह पहले मिट्टी और चट्टानों के सैंपल्स एकत्र किए गए थे। उन्हें वाडिया हिमालय जियोसाइंस इंस्टट्यूट की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया। इनकी जांच में 60 से 70 फीसदी तक तांबा और अन्य खनिजों के इसमें मौजूद होने की पुष्टि हुई है।
खान विभाग इस रिपोर्ट के बाद चौकस हो गई है। लधियाघाटी इलाके के विभिन्न स्थानों से जुटाए गए मिट्टी और चट्टानों के नमूनों को केमिकल टेस्ट के लिए बेंगलुरु की लैब में भेजा गया है। बेंगलुरु लैब की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की योजना बनेगी।
प्रभारी जिला खान अधिकारी और भू-वैज्ञानिक डॉ. हरीश बिष्ट ने कहा कि प्रारंभिक सर्वे में लधियाघाटी इलाके में विभिन्न जगहों पर तांबे के अयस्क ओरमेटाकाइट प्रचुर मात्रा में पाए गए हैं। इससे इलाके में बड़ी संख्या में तांबे की खदान होने की संभावना बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अन्य खनिजों और कच्चे तेल के भंडार का पता लगाया जा रहा है।
इलाके में करीब 40 साल पहले भी सर्वेक्षण कराया गया था। इस जियोलॉजिकल सर्वे में तांबे, यूरेनियम और कच्चे तेल का भंडार इलाके में होने की संभावना जताई गई थी। उस समय आर्थिक कमी और अन्य कारणों से रिसर्च प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। हालांकि, अब चंपावत के प्रभारी जिला खान अधिकारी डॉ. हरीश बिष्ट कहते हैं कि बेंगलुरु लैब में चट्टानों और मिट्टी के नमूनों की केमिकल जांच के लिए भेजा गया है। खनिजों के होने की पुष्टि होते ही डीपीआर तैयार कर काम शुरू कर दिया जाएगा।
चंपावत डीएम नवनीत पांडेय ने जियालॉजिकल सर्वे की प्रारंभिक रिपोर्ट के सही साबित होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि इलाके का जियोलॉजिकल सर्वेक्षण कराया गया है। प्राइमरी रिपोर्ट में तांबे समेत अन्य खनिजों की उपलब्धता की संभावना मिली है। अगर यह संभावना सच में बदलती है तो लधियाघाटी क्षेत्र में डेवलपमेंट के नए रास्ते खुलेंगे।