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संविधान के 75 साल : संसद में पीएम मोदी- राहुल गांधी की स्पीच के राजनीतिक मायने समझ लीजिए.

 
  • Kunal Kataria
  • 14 Dec 2024
  • 727
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नई दिल्ली : संविधान के 75 साल के मौके पर लोकसभा में हुई चर्चा में बोलते हुए पीएम मोदी व नेता प्रतिपक्ष ने अपने-अपने संबोधनों के जरिए देश को संविधान के सहारे अपनी सोच व अजेंडे को सामने रखने की कोशिश की। संविधान चर्चा के दौरान जहां सत्ता पक्ष व विपक्ष जहां खुद को संविधान का सबसे बड़ा पैरोकार दिखाने की कोशिश करता नजर आया तो वहीं दूसरी ओर अंबेडकर, राजेंद्र प्रसाद, पटेल, बोस जैसे चेहरों की विरासत पर दावेदारी जताता दिखा।

संविधान को कमजोर करने के आरोपों पर जवाब

पिछले कुछ समय से जिस तरह से विपक्ष ने देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमले की बात करते हुए मोदी सरकार पर देश के लोकतंत्र व संवैधानिक मूल्यों पर की अनदेखी का आरोप लगाया और लोकसभा चुनाव में विपक्ष की ओर से संविधान की प्रति लेकर अपनी चुनावी लड़ाई लड़ी गई, उसका जवाब देने के लिए पीएम मोदी ने संविधान के 75 साल के मौके पर हुई चर्चा को अपने लिए सुनहरा मौका माना।

लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह से कुछ दिनों तक संसद के दो सत्रों में पीएम और मोदी सरकार कुछ बैकफुट पर दिखी, लेकिन महाराष्ट्र व हरियाणा के चुनाव में हुई जीत के बाद आत्मविश्वास से भरे सत्तारूढ दल व पीएम मोदी ने संविधान के बहाने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा।

कांग्रेस पर मोदी का पलटवार

शनिवार को संविधान की लड़ाई में जिस पुरजोर तरीके से कांग्रेस की तरफ से सरकार पर निशाना साधा गया, उसके मद्देनजर पीएम मोदी ने 75 सालों के संवैधानिक यात्रा में हुए संशोधनों और इसके इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस पर ही पलटवार कर दिया। पीएम मोदी ने जिस तरह से संविधान का खून मुंह लगना, संविधान को लहूलुहान करना व उसकी आत्मा को तार-तार करने जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल कांग्रेस के संदर्भ में किया, उससे साफ है कि पीएम मोदी ने सधे हुए तरीके से विपक्ष के तमाम आरोपों को सिलसिलेवार ढंग से काटते हुए अपना पक्ष रखा।

हालांकि इस कोशिश में सत्तापक्ष की ओर से संविधान संशोधन के पीछे अपने अपने तर्क रखने की कोशिश भी हुई। बीजेपी व पीएम मोदी की तरफ संविधान संशोधन को लेकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि कांग्रेस के समय में संविधान संशोधन लोकतंत्र व उसके मूल्यों पर प्रहार की तरह सामने आए, जबकि बीजेपी ने देशहित व जनकल्याण के लिए यह बदलाव किए।

आधी आबादी को टारगेट करने की कोशिश

इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने इस अवसर को अपने सरकार की उपलब्धियों के जिक्र के तौर पर भी देखा। उन्होंने अनुच्छेद 370, भारत के तीसरी आर्थिक शक्ति बनने की कोशिश, जी-20 का सफल आयोजन व महिला आरक्षण बिल को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों के तौर पर सामने रखा। पीएम मोदी ने मातृभाषा, मातृ शक्ति को दिए जा रहे अवसरों का जिक्र करते हुए कहीं न कहीं देश की आधी आबादी को टारगेट करने की कोशिश की।

उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा की उपलब्धता को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को बहुत बल दिया है और अब गरीब परिवार के बच्चे मातृभाषा में पढ़ाई करके डॉक्टर-इंजीनियर बन सकते हैं। देश की आजादी के 100 सालों के मौके पर भारत को एक बड़ी शक्ति के तौर पर देखने का दावा करते हुए पीएम मोदी ने यह भी संकेत देने की कोशिश की कि वह अपने बड़े अजेंडों को आगे बढ़ाने से पीछे नहीं हटेंगे।

हाल ही में एक देश, एक चुनाव को कैबिनेट से पास कराना हो या फिर संबोधन में यूसीसी का जिक्र पीएम मोदी ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि भले ही केंद्र में गठबंधन की सरकार चला रहे हों, लेकिन अपने अजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए जो रोडमैप उन्होंने रखा है, उससे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
 

इंडिया गठबंधन का अजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश

राहुल ने अपने संबोधन के जरिए जहां एक ओर साफ कर दिया कि इंडिया गठबंधन जातिगत जनगणना को लेकर अपने अजेंडे से पीछे हटने वाला नहीं है। वह पुरजाेर तरीके से इसे आगे बढ़ाएगा। राहुल ने कहा कि हम न सिर्फ जातिगत जनगणना कराएंगे, बल्कि इसके लिए 50 फीसदी आरक्षण सीमा की दीवार भी गिराएंगे। शुक्रवार को को लेकर अपना इरादा दोहराया।

दरअसल, जातिगत जनगणना की बात कर इंडिया गठबंधन कहीं न कहीं दलित, आदिवासी व ओबीसी को गोलबंद करने की कोशिश कर रहा है, जो बीजेपी के 'कटेंगे तो बंटेंगे' अजेंडे की काट के तौर पर सामने आता है। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने सामाजिक रूप से पिछड़ों की बात को आगे बढ़ाने के लिए शनिवार को सावरकर व मनुस्मृति की बात कर कहीं न कहीं अगड़े बनाम पिछडों के बीच के समीकरणों को भी रेखांकित करने की कोशिश की।

गौरतलब है कि इंडिया गठबंधन के ज्यादातर क्षेत्रीय दल पिछडों की बात करते हैं। ऐसे में देश में इस सबसे बड़ी आबादी को अपने पाले में लाने की आतुरता व मजबूरी क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ कांग्रेस में भी दिखती है।

 

हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना पर भी चोट

राहुल ने संविधान के बरक्स मनुस्मृति का जिक्र कर कहीं न कहीं बीजेपी व संघ के उस हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना पर भी चोट करने की कोशिश की, जिसका जिक्र बीच-बीच में कभी बीजेपी नेताओं या कई बार संघ के लोगों द्वारा किया जाता है। जिस तरह से राहुल ने सावरकर द्वारा मनुस्मृति को संविधान से बेहतर करार बताने को रेखांकित किया, उससे साफ है कि कांग्रेस बीजेपी के हिंदुत्व व हिंदु राष्ट्र की परिकल्पना पर लगातार चोट करती रहेगी।
 

बेरोजगारी, किसानों, अग्निवीरों का मुद्दा

राहुल ने जिस तरह से बेरोजगारी, किसानों, अग्निवीरों व युवाओं के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, उससे पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह जमीन पर इन मुद्दों को बेअसर नहीं होने देगी। वहीं कांग्रेस ने अदाणी का जिक्र कर कहीं न कहीं यह संदेश देने की कोशिश भी की, भले ही उसके घटक दल अदाणी नाम लेने से परहेज करते रहें, लेकिन अदाणी को लेकर उसकी लड़ाई रुकने वाली नहीं है। वह इस मुद्दे को लेकर पीएम मोदी पर हमला जारी रखेगी।

 

 
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