देहरादून: उत्तराखंड में नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण का अध्यादेश मंजूर होने के बाद प्रक्रिया को तेज किया गया है। निकाय चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने आरक्षण की नियमावली तय कर दी है। शहरी विकास विभाग ने उत्तराखंड नगर निगम (स्थानों और पदों का आरक्षण एवं आवंटन) नियमावली 2024 की अधिसूचना जारी कर दी है। अपर सचिव गौरव कुमार ने गुरुवार शाम को इस संबंध में अधिसूचना को जारी कर दिया। आरक्षण आबादी के मानक के अनुसार लागू होगा। सूत्रों के अनुसार, शनिवार को अनंतिम प्रारूप जारी होगा। इस पर आपत्ति के लिए सात दिन मिलेंगे।
महिलाओं के आरक्षण का मानक तय कर लिया गया है। दो फॉर्मूला तय किए गए हैं। पहले फॉर्मूला के तहत, एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए किसी नगर निगम में आरक्षित किए जाने वाले स्थानों की संख्या आरक्षित वर्ग के लिए तय स्थानों की संख्या के एक तिहाई से कम नहीं होगी। अगर स्थानों की ऐसी संख्या का अवधारणा करने में कोई शेष बचता है तो भागफल में एक बढ़ा दिया जाएगा। इस प्रकार प्राप्त संख्या एससी, एसटी, ओबीसी महिलाओं के आरक्षित किए जाने वाले स्थानों की संख्या होगी।
दूसरे फॉर्मला के तहत महिलाओं के लिए किसी नगर निगम में आरक्षित किए जाने वाले स्थानों की संख्या उस नगर निगम में कुल स्थानों की संख्या में एक तिहाई से कम नहीं होगी। अगर स्थानों की संख्या का अवधारणा करने में शेष बचता है तो भागफल में एक बढ़ाया जाएगा। इस प्रकार प्राप्त संख्या एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए तय संख्या को शामिल करते हुए रिजर्वेशन वाले स्थानों की संख्या होगी।
एससी-एसटी के लिए: नगर निगम में मेयर पद के लिए आरक्षण फॉर्मूला तय कर दिया गया है। नगर निगमों के नगर प्रमुखों की कुल पदों की संख्या के निकटतम उसी के समानुपात में हो, राज्य के नगर निगमों में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति ऐसे इलाकों की कुल जनसंख्या में हैं। अगर ऐसे पदों की संख्या तय करने में कोई शेष बचता है और वह भाजक का आधा या आधे से कम होगा तो उसे छोड़ दिया जाएगा।
भाजक के आधे से अधिक होने की स्थिति में भागफल में एक बढ़ा दिया जाएग। इस प्रकार प्राप्त संख्या यथास्थिति, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए जाने वाले पदों की संख्या होगी।
ओबीासी वर्ग के लिए: पिछड़े वर्ग के लिए नगर निगम में आरक्षित किए जाने वाले पदों की संख्या का अवधारण इस प्रकार किया जाएगा कि वह नगर निगम के कुल पदों की संख्या के निकटतम उसी समानुपात में हो, जो नगर निगमों में पिछड़े वर्ग की संख्या का ऐसे क्षेत्र की कुल जनसंख्या में है। अगर स्थानों की संख्या का अवधारण करने में कोई शेष बचता है और वह भाजक का आधा या आधे से कम है तो उसे छोड़ दिया जाएगा।
शेष अगर भाजक के आधे से अधिक होगा तो भागफल में एक बढ़ा दिया जाएगा। इस प्रकार प्राप्त संख्या यथास्थिति पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने वाले स्थानों की संख्या होगी। इसी प्रकार नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी आरक्षण तय किया जाएगा।
उत्तराखंड के नगर निकायों में चुनाव को लेकर जारी आरक्षण सूची में कई चीजें साफ कर दी गई हैं। साफ किया गया है कि मानक के अनुसार ही आरक्षण सूची को लागू किया जाएगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग का कुल आरक्षण कुल स्थानों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।