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लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों को पंडित-मौलवी से लेना होगा सर्टिफिकेट, पिछले रिलेशनशिप के बारे में भरना होगा 16 पेज का फॉर्म.

 
  • Shubham Sehgal
  • 30 Jan 2025
  • 737
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देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर है। दरअसल उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित यूसीसी अधिनियम के तहत जो भी जोड़े लिव-इन रिलेशनशिप शुरू कर रहे हैं या समाप्त कर रहे हैं, इसकी जानकारी उन्हें सरकार के साथ साझा करनी होगी। यानी रजिस्टर करानी होगी। इस दौरान 16 पेज का फॉम भरना होगा, आधार से जुड़ा ओटीपी, पंजीकरण शुल्क, एक धार्मिक नेता से प्रमाण पत्र कि युगल यदि चाहें तो विवाह करने के योग्य हैं और यही नहीं पिछले संबंधों का विवरण भी देना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं-

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नियम ये बनाया गया है कि जोड़ों को लिव -इन रिलेशनशिप शुरू करने और समाप्त करने के दौरान पंजीकरण कराना अनिवार्य है। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो 6 महीने तक की जेल हो सकती है। यह नियम सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं प्रदेश में बाहर से आए किसी भी राज्य के निवासियों पर लागू होगा।

रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस ऑफलाइन या ऑनलाइन दोनों ही तरीकों से किया जा सकता है। इसमें उन्हें बताना होगा कि पहले से ही लिव-इन रिलेशनशिप में हैं या लिव-इन रिलेशनशिप में प्रवेश करने का इरादा रखते हैं। रजिस्ट्रेशन के दौरान उन्हें ये बताना होगा कि क्या इन्हें विवाह की अनुमति है, अगर है तो इसका प्रमाणपत्र देना होगा।

इसके तहत किसी धार्मिक नेता/समुदाय प्रमुख या संबंधित धार्मिक/समुदाय निकाय के किसी पदाधिकारी द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र देना होगा। जिसमें लिखा होगा कि पंजीयकों को नियंत्रित करने वाले रीति-रिवाज और प्रथा उनके बीच विवाह की अनुमति देते हैं। यही नहीं धार्मिक नेता की व्याख्या भी की गई है। इसके तहत किसी समुदाय के संबंध में इसका अर्थ उस समुदाय के पूजा स्थल का पुजारी या उस समुदाय से संबंधित धार्मिक निकाय का कोई पदाधिकारी है।

रिश्ते के पिछले इतिहास के सबूत के लिए, नियमों में मौजूदा लिव-इन रिलेशनशिप की शुरुआत से पहले वैवाहिक या लिव-इन रिलेशनशिप का विवरण देना ज़रूरी है। इन दस्तावेजों में तलाक का अंतिम आदेश, विवाह को रद्द करने का अंतिम आदेश, जीवनसाथी का मृत्यु प्रमाण पत्र, समाप्त लिव-इन रिलेशनशिप का प्रमाण पत्र शामिल हो सकता है।

यूसीसी के तहत रजिस्ट्रार के पास खुद से या शिकायत के आधार पर किसी व्यक्ति को उनके लिव-इन रिलेशनशिप को रजिस्टर्ड करने के लिए नोटिस जारी करने का अधिकार रहेगा। इसके अतिरिक्त, दस्तावेजों की सत्यता की संक्षिप्त जांच करने के अलावा, रजिस्ट्रार को लिव-इन रिलेशनशिप को पंजीकृत करने वाले पक्षों के कानूनी अभिभावक या माता-पिता को सूचित करना होता है, यदि वे 21 वर्ष से कम आयु के हैं।

रजिस्ट्रार को इन पंजीकरणों को स्थानीय पुलिस स्टेशनों को भेजना होगा, जहां युगल निवास करते हैं और मकान मालिकों के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का अस्थायी या अंतिम प्रमाणपत्र मांगना अनिवार्य है। अगर मकान मालिक के पास इनका प्रमाणपत्र नहीं मिलत है तो उन पर भी भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

 

 
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