नई दिल्ली : कांग्रेस ने अपनी जमीनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए जहां एक ओर देश में जातिगत जनगणना की मांग को पुरजोर ढंग से उठा रही है। वहीं वह देशभर में अगले एक साल के लिए जय बापू, जय भीम, जय संविधान रैली और यात्राएं निकालने का काम भी कर रही है। वह संविधान को सामने रख देश में एससी, एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी समुदायों को गोलबंद करने में जुटी है। कांग्रेस ने अब इस रणनीति को धार देने के लिए देश में इन समुदायों से जुड़े मुद्दों को धारदार ढंग से उठाने की योजना बनाई है। पार्टी ने तय किया है कि इन समुदायों से जुड़े जो भी मुद्दे होंगे, उन्हें वह योजनाबद्ध तरीके से लोगों के सामने रखेगी। सरकार को घेरेगी और उनकी जवाबदेही तय करेगी।
इसके मद्देनजर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को एसटी,एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली स्कॉलरशिप की मद में लगातार हो रही कटौती का मुद्दा उठाया। खरगे ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर सरकार पर आरोप लगाए कि वह इन समुदायों के हक के पैसों को हथियाने में लगी है। उन्होंने पीएम मोदी को सुनाते हुए लिखा कि इन समुदायों की स्कॉलरशिप को आपकी सरकार ने हथियाने का काम किया है।
.@narendramodi ji,
— Mallikarjun Kharge (@kharge) February 25, 2025
Your government has usurped the scholarships meant for SC, ST, OBC and Minority youth !
These shameful statistics show that the Modi Govt has not only drastically reduced the beneficiaries in all scholarships, but has also reduced the funds by an average of… pic.twitter.com/6jfpeLjrwN
खरगे ने सरकारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि शर्मनाक सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सभी वजीफों में मोदी सरकार ने लाभार्थियों की भारी कटौती तो की है, साथ ही औसतन साल-दर-साल 25 फीसदी फंड भी कम खर्च किया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि जब तक देश के कमजोर वर्ग के छात्रों को अवसर नहीं मिलेगा, उनके हुनर को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, तब तक हम अपने देश के युवाओं के लिए नौकरियां कैसे बढ़ा पाएंगे? खरगे ने मोदी सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारों को कमजोर वर्गों के अरमानों का मजाक उड़ाना बताया।
वहीं दूसरी ओर यूपी के एससी विभाग के अध्यक्ष तरुण पुनिया ने यूपी में टीचर्स भर्ती में आरक्षित समुदाय के लोगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पूरी भर्ती प्रक्रिया की जांच की मांग की। पुनिया ने आरोप लगाया कि टीचर्स भर्ती प्रक्रिया में हजारों आरक्षित सीटों पर अनारक्षित वर्ग के लोगों को नौकरियां दी गईं।
कांग्रेस ने इस पूरी कवायद को संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण के अधिकार का खुला उल्लंघन करार देते हुए सरकार को चेतावनी दी कि अगर यूपी सरकार तत्काल जवाबदेही तय नहीं करती, इस फैसले को वापस नहीं लेती, आरक्षित वर्गों के 18,500 से अधिक पदों पर आरक्षित उम्मीदवारों की बहाली नहीं करती तो कांग्रेस वंचितों को उनका हक और न्याय दिलाने के लिए आंदोलन करेगी।
इतना ही नहीं, कांग्रेस ने इस पूरे भर्ती घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की। साथ ही, उसका कहना था कि इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे छात्रों और टीचरों पर हो रहे दमन को रोका जाए। उन्होंने इस घोटाले को मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले से भी बड़ा करार दिया।
पुनिया ने एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा कि हमने दलितों और आदिवासियों से जुड़े मुद्दों को हर स्तर पर उठाने की योजना बनाई है। हमारे शीर्ष नेता भी सामाजिक न्याय के हक में आवाज उठाने की बात करते हैं। हम आने वाले समय में भी ऐसे मुद्दों को उठाएंगे। आज यूपी से ऐसा मुद्दा निकल कर आया है तो हम इसे मीडिया में लाए हैं। इनके अलावा, दूसरे जो भी मुद्दे होंगे, हम सरकार के सामने सवाल उठाएंगे, सरकार की जवाबदेही पूछेंगे।
पुनिया का कहना था कि यूपी में हाल ही में तीन घटनाएं हुई हैं, जहां दलितों को बारात निकालने से रोका गया। मथुरा, मेरठ और बिजनौर में ऐसी शिकायतें आई हैं। इनमें से दो जगह हमारे डेलिगेशन जमीन पर गए, ताकि असलियत पूरी तरह से सामने आ सके। कांग्रेस ने तय किया है कि समाज के वंचित समुदाय के साथ जहां भी अन्याय व अत्याचार होगा, पार्टी आवाज उठाएगी। जरूरत होगी तो ऐसे मुद्दों को लेकर संगठित तरीके से आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक कांग्रेस के वोट रहे हैं। समय के साथ यह वोट बैंक छिटक गया। कांग्रेस अब संविधान की बात कर इन समुदायों को एक बार फिर से संगठित करने में लगी है। दरअसल, गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने देखा कि संविधान पर हमले और संविधान बचाने की बात ने किस तरह से इन तमाम तबकों को गोलबंद किया कि 400 पार का दावा करने वाली बीजेपी को 240 पर ही रोक दिया था। कांग्रेस समझ रही है कि लगातार इन तबकों के मुद्दों और सरोकारों को केंद्र में रखकर वह जमीन पर एक बड़ी आबादी से जुड़ सकेगी। पार्टी का मानना है कि 'कटोगे तो बंटोगे' जैसे बीजेपी के नैरेटिव की काट यही हो सकता है कि इस आबादी के असली मुद्दों को उठाते हुए इन्हें जोड़ने की कोशिश की जाए।