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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड से पूछा, पर्यावरण कोष का इस्तेमाल कंप्यूटर और आईफोन खरीदने में क्यों किया गया?.

 
  • Kunal Kataria
  • 06 Mar 2025
  • 851
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देहरादून: उत्तराखंड सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल किए हैं। बुधवार को उत्तराखंड सरकार की ओर से वन भूमि के डायवर्जन के लिए भुगतान किए गए प्रतिपूरक वनरोपण निधि एवं जुर्माने को लैपटॉप, आईफोन, फ्रिज और कूलर खरीदने में खर्च करने पर कड़ी आपत्ति जताई। इस मामले में राज्य सरकार से एक पखवाड़े के भीतर जवाब मांगा। एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर ने सीएएमपीए निधि के उपयोग पर सीएजी रिपोर्ट जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष रखी।

सीएज रिपोर्ट में कहा गया है कि डिवीजनल स्तर पर 13.9 करोड़ रुपये राज्य योजना-हरेला, टाइगर सफारी कार्य, मौजूदा इमारतों के जीर्णोद्धार, व्यक्तियों के दौरे पर खर्च, अदालती मामले पर खर्च किए गए। साथ ही, रिपोर्ट में कहा गया है कि राशि का उपयोग आईफोन, लैपटॉप, फ्रिज, कूलर, स्टेशनरी आदि की खरीद जैसी अस्वीकार्य गतिविधियों पर डायवर्ट-खर्च किए गए।

सुप्रीम कोर्ट का सवाल

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि ऐसी अस्वीकार्य वस्तुओं और गतिविधियों के लिए कैम्पा से भारी धनराशि का उपयोग एक गंभीर मामला है। हम मुख्य सचिव को 19 मार्च तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा में ऐसी गतिविधियों पर इतनी बड़ी धनराशि कैसे खर्च की गई, इसका जवाब देने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि अगर हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो हम 20 मार्च को कोर्ट में उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दे सकते हैं।

कैम्पा निधि का हुआ डायवर्जन

कालागढ़ टाइगर रिजर्व में आंतरिक पथ-छह मीटर चौड़ी टाइगर सफारी सड़क के निर्माण, वन विश्राम गृह के आधुनिकीकरण, वन रक्षक चौकियों और हाथी सुरक्षा दीवार, वॉच टावरों के निर्माण के साथ-साथ लैंटाना हटाने के लिए कैम्पा निधि के 2.7 करोड़ रुपये का डायवर्जन किया गया। सीएजी ने कहा कि प्रतिपूरक वनीकरण निधि नियमों के नियम 5(4) और राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित वार्षिक योजना संचालन की शर्तों के तहत ये गतिविधियां उचित नहीं थीं।

सीएजी ने 2019-22 के दौरान अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों को लागू करने में कैम्पा और कार्यान्वयन एजेंसियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया। सीएजी ने कैम्पा फंड के असमान वितरण पर भी चिंता जताई। सीएजी ने कहा कि फंड जारी करना अवास्तविक था और स्वीकृत वार्षिक परिचालन योजना के अनुरूप नहीं था। राज्य प्राधिकरण सभी कार्यान्वयन एजेंसियों में गतिविधियों के लिए समान और आवश्यकता आधारित फंडिंग सुनिश्चित करने में विफल रहा।

सीएजी रिपोर्ट में कई खुलासे

सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि फंड जारी करने में अक्षमता-अप्रभावशीलता थी। प्रतिपूरक वनीकरण निधि नियमों के अनुसार लेखांकन प्रक्रियाओं को नहीं अपनाया गया। ब्याज देयता का निर्वहन नहीं किया गया। इसके अलावा, राज्य प्राधिकरण ने राज्य प्रतिपूरक वनीकरण निधि से डायवर्सन-अस्वीकार्य खर्च को नियंत्रित नहीं किया।

सीएजी ने यह भी पाया कि राज्य में वनीकरण गतिविधियों से कम रिटर्न मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वृक्षारोपण का कुल औसत उत्तरजीविता प्रतिशत 33.5 फीसदी था, जो कि अनिवार्य 60 से 65 फीसदी से कम है। नमूना जांच के तहत तीन प्रभागों- नैनीताल, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग में, वृक्षारोपण स्थलों पर उत्तरजीविता दर बहुत कम थी। इसका मुख्य कारण भूदृश्य का अनुपयुक्त होना या वृक्षारोपण से पहले मिट्टी की उचित देखभाल न किया जाना था।

 

 
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